श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ 

(प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक साहित्य ”  में हम श्री विवेक जी की चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल  (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी , जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। आज प्रस्तुत है श्री विवेक जी का समसामयिक  विषय पर आधारित रचनाकारों की मनोदशा दर्शाता आलेख  कोरोना काल और व्यंग्य लेखन। इस अत्यंत सार्थक  व्यंग्य के लिए श्री विवेक जी का हार्दिक आभार। )

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # 68 ☆

☆ व्यंग्य – कोरोना काल और व्यंग्य लेखन ☆

कोरोना जैसे वायरस के लगभग 100 वर्षों के अंतराल में एक बार आने की आवृत्ति देखी गई है । विकिपीडिया के अनुसार 1820 मैं वैश्विक प्लेग के बाद 1920 में स्पेनिश फ्लू और अब 2020 में  कोरोना का प्रकोप दुनियाभर में है । इस वायरस ने सबको अचानक एकाकी कर दिया है ।

प्रायः रचनाकार के एकाकी मन में अभिव्यक्ति की छटपटाहट होती है

कोरोना काल का यह अत्यंत दुखद पहलू रहा की यह समय विसंगतियों से भरपूर है,अनायास बिना स्पष्ट प्लानिंग के टोटल लाकडाउन सुदूर गांवों तक लागू हुआ जो जहां था वहीं अटक गया ।

सारे देश मे सोनूसूद की जिजीविषा, गुरुद्वारों के लंगर की  जरूरत महसूस हो रही थी,  छोटे छोटे प्रयास हर शख्स ने किए भी, मध्यवर्ग ने अपनी कामवाली, माली, चौकीदार,ड्राइवर को बिना काम वेतन दिए, सरकार ने भी उनकी समझ में बहुत कुछ किया पर यह सब नाकाफी सिध्द हो रहा है, देश, परिवार, संस्थाओं की आर्थिक स्थितियां गड़बड़ा गई हैं ।

व्यंग्यकार जो हर छोटी बडी घटना पर लिखता है, इस सब परिवेश पर चुप रह ही नही सकता, फिर खाली समय ने अतिरिक्त सहयोग किया ।

स्वयं मैंने लाकडाउन शीर्षक से एक व्यंग्य संकलन वैश्विक स्तर पर संकलित किया जो छपने को है, व्यक्तिगत स्तर पर अनेक व्यंग्य लिखे जो कोरोना की वैश्विक विसंगतियों पर केंद्रीय भाव के  साथ हैं।

इस परिचर्चा के संदर्भ में आशय यही है कि कोरोना जनित अभूतपूर्व स्थितियो में व्यंग्यकर्मियो के लिए असीमित कैनवास पर अपने अपने अनुभवों के आधार मनचाहे चित्रांकन के अवसर को हम व्यंग्य यात्रियों ने यथासम्भव सकारात्मक तरीके से उपयोग किया है ।

लेखन, प्रकाशन हमारी इसी ऊर्जा का सुपरिणाम है ।

 

© विवेक रंजन श्रीवास्तव, जबलपुर

ए १, शिला कुंज, नयागांव,जबलपुर ४८२००८

मो ७०००३७५७९८

≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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