श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए साप्ताहिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “मैने लखनऊ नहीं देखा ।)

?अभी अभी # 438 ⇒ मैने लखनऊ नहीं देखा? श्री प्रदीप शर्मा  ?

निभायी अपनी आन भी

बढ़ायी दिल की शान भी

हैं ऐसे महरबान भी

ये लख़नौउ की सर-ज़मीं …

ये लख़नौउ की सर-ज़मीं ..

मैने लखनऊ नहीं देखा, मुझे तो यह भी नहीं मालूम कि मुंबई की तरह लखनऊ में भी मरीन ड्राइव और ताज़ होटल है। यूं होने को तो आगरा में ताजमहल भी है, लेकिन हमने तो वह भी नहीं देखा।

लेकिन हमारे देखने, ना देखने से क्या फर्क पड़ता है। लखनऊ की जुबां और तहजीब के किस्से आम हैं। फिर पहले आप, पहले आप में, भले ही ट्रेन छूट जाए और यहां की तहज़ीब जिसे हम बोलचाल की भाषा में तमीज अथवा मैनर्स कहते हैं, उसका तो यह हाल है, मानो जीभ पर तहज़ीब की तह जमा दी हो। मजाल है कोई आपकी शान में गुस्ताखी कर दे।।

लखनऊ को अंग्रेजी में Lucknow लिखा जाता है। लखनऊ से केवल १५० km दूर ही तो है अवध, यानी राम जी की अयोध्या। हमने कुछ वर्ष पूर्व अयोध्या में रामलला के दर्शन तो कर लिए, लेकिन उनके भाई लखन की नगरी लखनऊ को देखने की हमारी आस मन में ही रह गई। Hard luck now, good luck next time. और तब तक, राम जी करे, शायद लखनऊ का नाम भी लखनपुर अथवा लक्ष्मणपुर हो जाए।

गोमती नगर में गोमती नदी से सटी सड़क की एक खूबसूरत पट्टी है। तहजीब और शान शौकत के इस शहर में, हाल ही में बरसते पानी में मरीन ड्राइव पर कुछ मनचलों द्वारा जो उपद्रव मचाया गया, उसने पूरे लखनऊ शहर की सभ्यता पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है। कलंक की कालिख प्रशासन की त्वरित सख्त कार्यवाही से कितनी कम होगी, कहा नहीं जा सकता। क्या इस घटना को सिर्फ भीड़ का मनोविज्ञान कहकर भुलाया जा सकता है।।

गुंडों को पहचाना जाएगा, पकड़ा जाएगा, दोषी अधिकारियों पर तो गाज गिर ही चुकी है। बारिश थम चुकी है, मरीन ड्राइव फिर से संयत हो, खुद को झाड़ पोंछकर सब कुछ भूल जाने की कोशिश करेगा। आह ताज फिर से वाह ताज बन चुका होगा। शुक्र है, मैने लखनऊ नहीं देखा..!!

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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