श्री अनिल वामोरकर

☆ कविता ☆

☆ दिक्षा दिन ☆ श्री अनिल वामोरकर ☆

 

छूकर

मेरे मस्तिष्क को

दिया आपने

अनुग्रह…

 

दिशाहीन

भटक रहा था

सन्मार्ग दिखाया

पालनहार..

 

निश्चिंत हूँ 

पार यह सागर

आपके चरणों मे

समा जाऊँगा…

 

© श्री अनिल वामोरकर

अमरावती

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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