श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “गणमान्य बनाम सेलिब्रिटी…“।)
अभी अभी # ७५६ ⇒ आलेख – गणमान्य बनाम सेलिब्रिटी
श्री प्रदीप शर्मा
अक्सर जो गणमान्य होते हैं, वे अतिथि ही होते हैं। जो दर्शकगण और श्रोतागण को मान्य हो, वह गणमान्य हो ही जाता है। अतिथि तो भगवान होता है, आप किसे भी अतिथि बनाकर बैठा दें, वह गणमान्य हो जाएगा।
आयोजन के पहले और पश्चात गणमान्य एकदम सामान्य हो जाता है। केवल मंच और सम्मान, उसे गणमान्य बनाता है। गणमान्य अतिथि का जो स्वागत करता है, कुछ समय के लिए वो भी असामान्य हो जाता है। कभी कभी तो ऐसी नौबत आ जाती है कि स्वागत करने वाला गणमान्य होता है, और स्वागत करवाने वाला अति-सामान्य। लेकिन क्या भरोसा, समय कब किसे गणमान्य बना दे और किसे सामान्य। ।
जब भी शहर में किसी विशिष्ट व्यक्ति का देहावसान होता है, विशेष शोकसभा आयोजित की जाती है, जिसमें नगर के गणमान्य नागरिक, पत्रकार, बुद्धिजीवी, साहित्यकार, राजनेता, समाजसेवी और धार्मिक नेता शोक संवेदना प्रकट करते हैं।
जिसे हम हिंदी में हस्ती कहते हैं, उसे अंग्रेज़ी में सेलिब्रिटी कहते हैं। हाल ही में हिंदी के एक सेलिब्रिटी को हिंदी से ही ग्लानि होने लगी। मुझे भी जब तक सेलिब्रिटी का हिंदी पर्याय नहीं सूझा, मुझे अपने आप से ग्लानि होने लगी। मैं धन्य हुआ, जब अवचेतन से स्वनामधन्य जैसा शब्द प्रकट हुआ। फिर तो मानो हिंदी में सेलिब्रिटीज की लाइन लग गई। हम पहले सेलिब्रिटी को तुर्रम खां कहते थे। वी आई पी तो हमारे शहर में पान की दुकान का नाम है।
जो गणमान्य होते हैं, वे भी एक तरह से सेलिब्रिटी ही होते हैं, लेकिन जब होटल रेडीसन पर ट्रैफिक जाम होता है, तब वे भी काँच का शीशा खोलकर ट्रैफिक हवलदार से पूछ ही लेते हैं, भई क्या बात है ? हवलदार लापरवाही से जवाब देता है, कोई सेलिब्रिटी ठहरा है होटल में, शायद विराट कोहली, उसी की भीड़ है। आगे बढिए !गणमान्य, सेलिब्रिटी के भाग्य को सराहता हुआ आगे बढ़ जाता है। ।
गणमान्य शहर का होता है, सेलिब्रिटी आन गाँव का सिद्ध ! सेलिब्रिटी के आगे पीछे टीवी कैमरे लगे रहते हैं, मानो कोई शूटिंग चल रही हो। सेलिब्रिटी फ़िल्म कलाकार भी हो सकता है और क्रिकेट खिलाड़ी भी। नेता भी सेलिब्रिटी होते हैं, लेकिन उनके लिए केवल कार्यकर्ताओं की भीड़ एकत्रित होती है, आम आदमी की नहीं।
सेलिब्रिटी का कोई व्यक्तिगत जीवन नहीं होता। उसका एक बयान, या एक ट्वीट दुनिया हिला सकता है। उसके एक ट्वीट पर टीवी पर बहस हो सकती है, धरना, प्रदर्शन हो सकते हैं, उसे गिरफ्तार करने की माँग भी हो सकती है। ।
किसे मालूम है जब राजीव गाँधी एक साधारण पायलट थे, सराफे में चुपचाप रबड़ी खाकर चले जाते थे, पीएम बनते ही, इस दुनिया से ही चले गए।
अखबार, सोशल मीडिया, टीवी चैनल सब सेलिब्रिटीज के लिए ही बने हैं। अगर सेलिब्रिटीज न हों, तो न तो लक्स साबुन बिके और न ही फेयर एंड लवली। क्या आप जानते हैं, पहला केंट, R O वाटर फ़िल्टर कौन लाया ? स्वप्न सुंदरी हेमा मालिनी ! अगर बिग बी ठंडा ठंडा कूल कूल नवरत्न तेल का विज्ञापन लेकर नहीं आते, तो क्या आपको पता चलता, यह कितना कूल है। ।
सेलिब्रिटी होना, अगर एक वरदान है तो एक अभिशाप भी। एक स्वतंत्र देश का नागरिक होते हुए भी न तो वह आज़ादी से जी सकता है, न मर सकता। उसके व्यक्तिगत जीवन पर निगाहें रखी जाती है। वह खुली सड़क पर, अपना सीना तानकर नहीं निकल सकता। उसकी मौत भी एक रहस्य बन जाती है। कॉफ़ी किंग वीजी सिद्धार्थ को ही ले लीजिए ! वे आज नहीं हैं, पर उनकी चर्चाएँ बहुत हैं।
ईश्वर हमें सब कुछ बनाए, कभी गणमान्य न बनाए, कोई सेलिब्रिटी न बनाए। एक आज़ाद पंछी की तरह अपनी ज़िंदगी जीयें, और समय आने पर फुर्र से उड़ जाएँ। न कोई शोकसभा न किसी किस्म का राष्ट्रीय शोक। शौक से जीयें, शौक से मरें। ।
© श्री प्रदीप शर्मा
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