श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “संगीत चिकित्सा।)

?अभी अभी # ९५७ ⇒ आलेख – संगीत चिकित्सा ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

लिपटन माने अच्छी चाय!

संगीत चिकित्सा माने

म्यूज़िक थेरेपी।

जहाँ चाह, वहाँ राह! चिकित्सा विज्ञान के अंतर्गत चिकित्सा की कई प्रणालियों का समावेश होता है। जिनमें देसी, विदेशी और यूनानी पद्धति प्रमुख हैं। हमारे देश में प्रमुखतः एलोपैथी, होमियोपैथी और नेचुरोपैथी का प्रचलन अधिक है। महर्षि धन्वन्तरी की आयुर्वेदिक चिकित्सा आज भी अपना महत्व रखती है।

मर्ज़ बढ़ता गया, ज्यूं ज्यूं दवा की! जब रोग असाध्य हो जाता है, तो इंसान सभी पेथियों को लात मार थेरैपी पर उतर आता है। चिकित्सा भी स्थूल से सूक्ष्म पर उतर आती है। कहीं यौगिक क्रिया, कहीं रेकी तो कहीं एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर का सहारा लिया जाता है। जोड़ों और नसों के दर्द के लिए अगर फिजियोथेरेपी है तो पेट की समस्याओं के लिए हायड्रोथेरैपी।।

जो योग आत्मा से परमात्मा को जोड़ता था, वह इंसान को रोगमुक्त करने के काम आने लग गया। सही भी है! पहले रोग-मुक्त तो हो जाएं, मुक्ति और मिलन बाद की बात है। कुंडलिनी को जब जागना होगी, जाग लेगी! पहले रात को चैन की नींद और सुबह खुलकर शौच तो हो ले। कहा भी है, पहला सुख निरोगी काया।

स्वच्छता और स्वास्थ्य ही हमारी मूलभूत आवश्यकता है। देश से बीमारी और गंदगी दूर करने का बीड़ा केवल राजयोगी और योगी मिलकर ही उठा सकते हैं। बाबा रामदेव और मोदी हैं, तो यह मुमकिन है। दोनों की अपनी अपनी आलीशान दुकान है।।

संगीत और आध्यात्म तन की नहीं, मन की साधना है। कौन जानता था कि जो कभी सङ्गीत महाविद्यालय था, वह आगे चलकर संगीत चिकित्सालय का रूप धारण कर लेगा। जिस तरह आसन और प्राणायाम का उपयोग बीमारियां ठीक करने के लिए किया जाने लगा है, संगीत से भी आजकल रोगोपचार किया जा रहा है।

मुझे रात को नींद नहीं आती आचार्य जी! ऐसा कीजिए, आप रोज रात को आधा घंटा, राग यमन सुना कीजिये, आपको तुरंत नींद आ जाएगी। शास्त्रीय संगीत की सभा में इसका मुझे कई बार अनुभव हुआ है। म्यूजिकथेरेपी का दावा है कि इसका असर कोमा के मरीज पर भी संभव है। मन की सूक्ष्म तरंगें अवचेतन में संगीत की स्वर-लहरियों से आंदोलित होने लगती हैं। स्वर की साधना परमेश्वर की साधना तो है ही, असाध्य रोगों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखा गया है।

इसमें कोई शक नहीं कि संगीत संजीवनी का काम करता है। जिन्हें शास्त्रीय संगीत से एलर्जी है, उनके लिए शास्त्रीय रागों पर आधारित फिल्मी गाने हैं न।

डर लगे तो गाना गा।।

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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