श्री गोपाल सिंह सिसोदिया ‘निसार’
(श्री गोपाल सिंह सिसोदिया ‘निसार ‘ जी एक प्रसिद्ध कवि, कहानीकार तथा अनेक पुस्तकों के रचियता हैं। इसके अतिरिक्त आपकी विशेष उपलब्धि ‘प्रणेता संस्थान’ है जिसके आप संस्थापक हैं। आज प्रस्तुत है दिव्यांग आरक्षण पर एक विचारणीय आलेख – दिव्यांग आरक्षण पर डाका : फर्जी प्रमाण पत्रों की चुनौती।)
☆ दिव्यांग आरक्षण पर डाका : फर्जी प्रमाण पत्रों की चुनौती ☆ श्री गोपाल सिंह सिसोदिया ‘निसार’ ☆
भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसका सामाजिक न्याय का वचन है। यह वचन केवल संविधान की धाराओं में नहीं, बल्कि उन संवेदनाओं में जीवित है जो समाज के सबसे वंचित तबके तक अवसर पहुँचाने की कोशिश करती हैं। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 इसी संवेदनशीलता की परिणति है, जिसने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में चार प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित किया। यह मात्र “कोटा” नहीं था, बल्कि यह मान्यता थी कि दिव्यांगजन अपने अधिकारों और सामर्थ्य के साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में बराबरी से भाग ले सकते हैं। विडम्बना यह है कि जिस व्यवस्था को न्याय का सेतु बनना था, वही धीरे-धीरे फर्जीवाड़े का अड्डा बनती जा रही है। हाल ही में राजस्थान में जो खुलासा हुआ, उसने दिखा दिया कि किस तरह नकली दिव्यांग प्रमाण पत्रों के सहारे नियुक्तियों का खेल खेला जा रहा है। यह कोई साधारण चूक नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और संविधान की आत्मा पर सीधा प्रहार है। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इतनी जटिल चयन और नियुक्ति प्रक्रिया के भीतर यह सब बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के संभव है?
राजस्थान की घटना कोई अकेला उदाहरण नहीं है। उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती घोटाले से लेकर दिल्ली में मेडिकल और विश्वविद्यालय प्रवेश तक, महाराष्ट्र में रेलवे और पुलिस भर्ती से लेकर तमिलनाडु के मेडिकल एडमिशन तक, लगभग हर जगह नकली प्रमाण पत्रों का नेटवर्क पकड़ में आया। बिहार और केरल जैसे राज्यों में भी बार-बार इसी तरह की घटनाएँ सामने आती रही हैं। यह तस्वीर साफ़ करती है कि यह समस्या किसी एक प्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की है।
इन सबके बीच पूजा खेड़कर का मामला विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करता है। उन्होंने मानसिक रोग श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सिविल सेवा में प्रवेश पाया और प्रशिक्षण तक पहुँच गईं। बाद की जाँच में यह प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया और उनका छल सबके सामने आया। यह मामला यह साबित करता है कि यह केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि पूरे आरक्षण तंत्र की साख पर गहरी चोट है। यह प्रश्न केवल कानून का नहीं, संवेदना का भी है। जब कोई व्यक्ति नकली दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी हासिल करता है तो वह न केवल राज्य और संविधान से धोखा करता है, बल्कि उस संघर्षशील युवक या युवती का भी अधिकार छीन लेता है जिसने वास्तविक चुनौतियों के बीच शिक्षा और प्रतियोगिता की तैयारी की। यही कारण है कि इसे दुगुना अन्याय कहा जाना चाहिए।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत ऐसे अपराधों पर धारा 318 में धोखाधड़ी, धारा 336 में कूटरचना और धारा 338 में कूटरचित दस्तावेज़ के प्रयोग का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 89 भी इन कृत्यों को दंडनीय मानती है। कई मामलों में दोषियों को सेवा से बर्खास्त किया गया, वेतन की वसूली की गई और भविष्य की भर्तियों से प्रतिबंधित किया गया। लेकिन केवल दंड देना ही पर्याप्त नहीं है, क्योंकि समस्या जड़ों में कहीं अधिक गहरी है।
समाधान के लिए यह अनिवार्य है कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल हो। बायोमेट्रिक आधारित राष्ट्रीय डेटाबेस बनाया जाए जिसमें सभी प्रमाण पत्रों का तत्काल सत्यापन संभव हो। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को चाहिए कि इस दिशा में ठोस कदम उठाए और सर्वोच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान लेकर राज्यों को यह निर्देश दे कि नियुक्तियों की निष्पक्ष जाँच समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए। केवल दोषियों को दंडित करने से बात पूरी नहीं होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि असली हकदार अभ्यर्थियों को न्यायपूर्ण अवसर और पदोन्नति समय पर मिले।
आज हमारे सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या हम उन अधिकारों की रक्षा कर पाएँगे जिन्हें समाज ने सहानुभूति से नहीं, बल्कि समानता की भावना से दिया है। विद्यानिवास मिश्र ने लिखा है कि व्यवस्था पर विश्वास तभी टिकेगा जब उसकी जड़ों में सच्चाई और संवेदना की नमी बनी रहे। यदि यह नमी सूख गई, तो लोकतंत्र का यह पौधा केवल कानून की किताबों में जीवित रहेगा, जनता के जीवन में नहीं।
संदर्भ सूची
- भारत सरकार. भारतीय न्याय संहिता, 2023. विधि एवं न्याय मंत्रालय, 25 अगस्त 2023. https://egazette.nic.in.
- भारत सरकार. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016. विधि एवं न्याय मंत्रालय, 28 दिसम्बर 2016. https://disabilityaffairs.gov.in.
- “राजस्थान में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से सरकारी नौकरी का खुलासा.” द टाइम्स ऑफ इंडिया, 28 फ़रवरी 2025, https://timesofindia.indiatimes.com/city/jaipur/24-govt-staff-fake-disabilities-to-get-jobs-reveals-sog-probe/articleshow/123150436.cms.
- यूपी में शिक्षक भर्ती में फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल.” द टाइम्स ऑफ इंडिया, 16 दिसम्बर 2017, https://timesofindia.indiatimes.com/city/agra/2k-up-govt-teachers-used-fake-disability-docus-to-secure-jobs-scrutiny-on/articleshow/62099286.cms.
- दिल्ली में नकली दिव्यांग प्रमाण पत्र गिरोह का पर्दाफाश.” द इंडियन एक्सप्रेस, 12 नवम्बर 2016, https://indianexpress.com/article/cities/delhi/fake-certificates-gang-busted-delhi-police-4398200/.
- महाराष्ट्र पुलिस व रेलवे भर्ती में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र.” हिंदुस्तान टाइम्स, 4 मार्च 2019, https://www.hindustantimes.com/india-news/maharashtra-police-railway-fake-disability-certificate-case-101551234657893.html.
- तमिलनाडु मेडिकल प्रवेश में फर्जी श्रवण-दृष्टि बाधा प्रमाण पत्र.” द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, 10 सितम्बर 2020, https://www.newindianexpress.com/states/tamil-nadu/2020/sep/10/students-use-fake-disability-certificates-for-medical-admission-2194561.html.
- पूजा खेड़कर मामला: पुणे अस्पताल की रिपोर्ट.” हिंदुस्तान टाइम्स, 30 जुलाई 2024, https://www.hindustantimes.com/india-news/puja-khedkar-case-pune-hospital-finds-no-foul-play-in-disability-certificate-101721865366403.html.
- सुप्रीम कोर्ट ने दी ज़मानत: पूजा खेड़कर.” द टाइम्स ऑफ इंडिया, 6 मई 2025, https://timesofindia.indiatimes.com/india/has-she-killed-someone-asks-supreme-court-grants-bail-to-puja-khedkar/articleshow/121324285.cms.
© श्री गोपाल सिंह सिसोदिया ‘निसार’
दिल्ली
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈



