सुश्री मनवीन कौर पाहवा
(ई-अभिव्यक्ति में सुश्री मनवीन कौर पाहवा जी का हार्दिक स्वागत। आप सेवानिवृत प्रधानाध्यापिका एवं अध्यक्ष तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रिय मंचों की सदस्या, संचालिका व आतिथेय। प्रकाशन – काव्य संग्रह – ‘तरुवर’, ‘शाख़ के पत्ते’ व ‘रंगोली’। लघुकथा संकलन -‘कृति’। यात्रा संस्मरण – ‘यादों की पिटारी’, समीक्षा – देवी नागरानी जी के काव्य संग्रह ‘ माटी कहे कुम्हार से’। आलेख – शिक्षा व महिला सशक्तिकरण में प्रथम हस्ताक्षर । १११ संस्मरण पुस्तक में संस्मरण प्रकाशित। १००० कवियों का काव्य संग्रह मेरा अक्स में कविता। लंदन से प्रकाशित पत्रिका पुरवाई में लघु कथा , कहानी व कविताओं का प्रकाशन। लोकमत, सत्य शोधक, पंजाब सौरभ, हस्ताक्षर, साहित्य सागर, अन्य पत्र -पत्रिकाओं व साँझा संकलनों में कविता, लघु कथा, कहानी आदि का प्रकाशन। आल इंडिया रेडियो से कविताओं व साक्षात्कार का सीधा प्रसारण। लघुकथा व बाल गीत के लिए ‘उत्कृष्ट सृजन’ पुरस्कार व ‘श्री काव्य कनक साहित्य सम्मान‘। माँ भारती कविता महायज्ञ व वाणी माँ भारती में संचालन और सहभागिता व ‘काव्य सारथी सम्मान। ।स्टोरी मिरर द्वारा बाल कहानी लेखन प्रतियोगिता में सम्मान पत्र, अन्तराष्ट्रीय शब्द सृजन सम्मान, ‘आउट्स्टैंडिंग विनर‘ व अन्य पुरस्कार।)
☆ लघुकथा – मैं कहाँ हूँ? ☆ सुश्री मनवीन कौर पाहवा ☆
नन्ही कन्नू सोच रही थी। कितना अच्छा लगता था ना जब मैं सारा दिन माँ का आँचल पकड़कर घर भर में घूमा करती थी। पानी में खेलती थी तो माँ मुझे झिड़कती थीं। बाहर धूप में भी नहीं जाने देती थी। रह रह कर मुझे गले लगाकर मेरी प्यारी कन्नू कहकर लाड़ जताती थी। ये जब से छोटा मुन्ना आया है। माँ उसी को गोदी में लेकर बैठी रहती हैं। ना मुझे बाहर जाने पर देखती हैं ना ही लोरी सुनाकर सुलाती हैं। ज़िद करती हूँ तो डाँटती हैं। पापा भी जब आए थे तो मुन्ना को ही प्यार कर रहे थे। मुझे कोई प्यार नहीं करता।
नानी भी कुछ नहीं कहतीं ना गोदी में उठाती हैं ना कुछ कहती है। बस खाना खाने के लिए बुलाती हैं। मैं तो अभी तीन साल की भी नहीं हुई। मुझे सब क्यों भूल गए।
आज मौसी आई हैं। वो भी मुन्ना को ही गोद में लेकर बैठी हैं। सब बातें करते रहते हैं। रात भी हो गई। मेरी तरफ़ किसी का ध्यान ही नहीं है। लो बत्ती चली गई। पहले अँधेरा होने पर माँ दौड़ कर मुझे ढूँढती थीं। अब दौड़ कर मुन्ना को उठा रही होंगीं। उसने घबरा कर जोर से कहा,” माँ, मैं कहाँ हूँ। ”
आवाज़ सुनते ही सब चौंक गए।
© सुश्री मनवीन कौर पाहवा
२५/८/२५
मुंबई, महाराष्ट्र (भारत)
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