डॉ. रामेश्वरम तिवारी

संक्षिप्त परिचय

  • हिंदी-प्राध्यापक(सेवानिवृत्त) महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल  (म.प्र).
  • नई दुनिया, दैनिक भास्कर, वीणा, हंस, धर्मयुग, कादम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविता और लघुकथाएँ प्रकाशित। पुस्तकः कविता के ज़रिए,  मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित।

आज प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम विचारणीय लघुकथा वक्त सबका बाप है

☆ लघुकथा – वक्त सबका बाप है ☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी

गली, मोहल्ले, गाँव से लेकर शहर, शहर से लेकर देश, और देश से लेकर दुनिया भर में चौधरियों की भरमार है। यह परम्परा भिन्न-भिन्न नामों और उपाधियों से आदिम काल से चली आ रही है और आगत में भी अनवरत रूप से गतिमान रहेगी।

चौधरी अपने को सर्व शक्तिमान मानता है और कई मायनों में होता भी है। उसके चारों ओर चमचों की फ़ौज लगी रहती है। वह प्रशंसा का भूखा होता है। बड़ी-बड़ी डींगें हाँकना उसकी आदत में शुमार होता है। अपनी ताकत और दौलत के बूते पर ज़रूरतमंद और कमजोर व्यक्तियों पर अपनी हुकूमत क़ायम रखता है। अपने जायज़-नाजायज फ़ैसलों को थोपकर अपना रौब गाँठता है। अपने अधीनों पर जुल्म और ज़्यादतियाँ ढहाता है और बेचारे अधीनस्थ चुपचाप बर्दाश्त करते रहते है।

इधर पिछली सदी में दुनिया के सबसे बड़े और शक्तिशाली चौधरी के समक्ष छोटे, पर खुद्दार और मजबूत इरादों के धनी चौधरी ने चुनौती पेश कर दी है। उनके बीच ऐसी ज़बरदस्त भिड़ंत हुई कि उसकी बड़े चौधरी की हेकड़ी निकल गई। वह पगला कर गली के गुंडों की तरह धमकियों पर उतर आया। कल तक जो दुनिया में लगी युद्धाग्नि को बुझाने के हवाई दावे किया करता था, आज वही दुनिया को आग के हवाले करने की बातें कर रहा है।

पर इन दिनों हवा में ग़ज़ब का शोर है। लोगों का कहना है कि बड़बोले चौधरी का भेजा फिर गया है। दुनिया को अपनी उँगली पर नचाना चाहता है, पर वह भूल गया कि वक्त के दरिए का ढेर सारा पानी बह चुका है। वह जिन देशों के लोगों को गँवार और जंगली समझा करता था उनमें आत्म स्वाभिमान जाग उठा है। वे अपने पैरों पर उठ खड़े हुए हैं। उन्होंने सहमति में सिर हिलाने, हाथ ऊपर उठाने और जी-हजूरी करने से साफ़-साफ मना कर दिया है।

कदाचित मद में अँधा चौधरी भूल गया कि दुनिया में किसी भी महाबली की चौधाराहट हमेशा के लिए नहीं रही है। वक्त का कोई बाप नहीं है। वक्त सबका बाप है। और जब वक्त अपने पर आता है, तो बड़े से बड़े राजे-महाराजे, अर्जुन जैसे धनुर्धरों, भीम जैसे महाबाहो, सिकंदरों, बादशाहों की पलक झपकते खटिया खड़ी कर देता है।… तो सुनो! मिस्टर चौधरी फिर तुम किस देश की मूली हो।

© डॉ. रामेश्वरम तिवारी

सम्पर्क – सागर रॉयल होम्स, होशंगाबाद रोड, भोपाल-462026

मोबाईल – 8085014478

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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