श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘भारत की आजादी …‘।)
☆ अभिव्यक्ति # १२१ ☆
☆ भारत की आजादी … ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
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भारत की आजादी को, बड़ी मुश्किल से पाया है,
मत पूछो इसको पाने में, हमने क्या गंवाया है.
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मातृभूमि पर, रणबांकुरे, हंसते हंसते बलिदान हुए,
देश बचाने, धर्म बचाने, अपना शीश गंवाया है.
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खून शहीदों का झण्डे में, तिरंगा तब फ़हराया है,
सीमा पर फौजी की साँसों से, ये झंडा लहराया है.
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मिलजुल कर हम एक रहेंगे, गर्व से दिवस मनाएंगे,
झंडे को सलामी देंगे, शहीदों को, भुला न पाएंगे.
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आओ मिलकर याद करें हम, शहीद बलिदानों को,
रक्त से जिनने सींचा है, भारत के इन मैदानों को.
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छोटी छोटी बातों में, अब हमको नहीं उलझना है,
एक रहेंगे, नेक रहेंगे, बस आगे ही बढ़ते रहना है.
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
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