सुश्री मंजिरी “निधि”
(बड़ोदा से सुश्री मंजिरी “निधि” जी की गद्य एवं छंद विधा में विशेष अभिरुचि है और वे साथ ही एक सफल महिला उद्यमी भी हैं। आज प्रस्तुत है आपकी कविता ‘श्री राम ‘।)
कविता – श्री राम ☆ सुश्री मंजिरी “निधि”
(हाकली छंद)
राम नाम का जाप करो
जग का ये संताप हरो l
सुबह करो या शाम करो
सदा राम का नाम धरो ll
*
राम नाम शब्द अधारा
जीव सृष्टि की यह धारा l
जो राम नाम अपना ले
जीवन का सब सुख पा ले ll
*
जीवन में उल्लास भरो
अधरों पर मधुहास भरो l
नेहा रस छलके जीवन
आनंदित हो सबका मन ll
☆
© सुश्री मंजिरी “निधि”
बड़ोदा, गुजरात
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






