डॉ. रामेश्वरम तिवारी

संक्षिप्त परिचय

  • हिंदी-प्राध्यापक(सेवानिवृत्त) महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल  (म.प्र).
  • नई दुनिया, दैनिक भास्कर, वीणा, हंस, धर्मयुग, कादम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविता और लघुकथाएँ प्रकाशित। पुस्तकः कविता के ज़रिए,  मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित।

आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता – जीवन जिए जा रहा हूँ…!

☆ ॥ कविता॥ जीवन जिए जा रहा हूँ…! ☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी

 

बचपन में, गाँव में,

बरसात के दिनों में

नदिया के पानी को तूफ़ानी रफ्तार से

जोर-शोर से दहाड़ मारकर

अपने प्रियतम सागर से मिलने के लिए

रोते-बिलखते हुए देखा है।

 

पर पापी पेट के फेरे में

जबसे घर-गाँव छूटा है

और महानगर में आकर बसा हूँ

महानगर के बीचों-बीच

चौबीसों घंटों सड़कों पर

वाहनों के लगातार बहते हुए

रेलों का शोर-शराबा सुनकर

कान बहरा गए हैं  और ह्रदय

एक अजीब से खौफ से बैठा जाता है।

 

रोज-रोज, बार-बार

मन वापस गाँव लौट जाने को करता है

पर गाँव में भी अब कहाँ

वो बचपन के लंगोटिया यार

निःस्वार्थ प्रेम करने वाले लोग रह गए हैं

इसलिए न चाहते हुए भी

महानगर में रहने के लिए

अभिशप्त जीवन जिए जा रहा हूँ।

© डॉ. रामेश्वरम तिवारी

सम्पर्क – सागर रॉयल होम्स, होशंगाबाद रोड, भोपाल-462026

मोबाईल – 8085014478

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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