डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं डॉ  राजकुमार तिवारी ‘सुमित्र’ जी की दूसरी पुण्यतिथि पर एक कविता – पिता -असीम आकाश)

☆ कविता – पिता-असीम आकाश ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

देखते हैं स्वप्न

जीवन है असीम आकाश

जहां सपनों के पंख फैले हैं

गर्मी है जहां छाँव भी है

ठंड भी है और बारिश भी है

इसी रूप में हम देखते हैं

अपने पिता को

यही जीवन का आकाश

कभी धधकता सूरज बनता है

हमें तपाकर मजबूत करता है

कभी शीतल चांदनी का एहसास है

असीम आकाश में –

कोई नहीं होती सीमा

हर उड़ान संभव है

थामे रहो विश्वास के पंख

पिता जीवन का आकाश है

उनमें धैर्य है, दृढ़ता है,

विस्तार है और स्वतंत्रता है

यही प्यारा आकाश है

जिसकी छांव में मिलता है

हमें जीवन का अर्थ-

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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