प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे

☆ नव संवत्सर के दोहे ☆ प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे

नव संवत्सर आ गया, गाने मंगल गीत।

प्रियवर अब दिल में सजे, केवल नूतन जीत।।

चैत्र महीना प्रतिपदा, जो लाया उजियार।

यही हमारा वर्ष है, विजय करे श्रंगार।।

 *

ब्रम्हा जी ने सृष्टि का, किया नवल – निर्माण।

शुक्ल पक्ष तो सोहता, मौसम मेँ नव प्राण।।

 *

उज्जयिनी महाराज ने, देकर चोखा काल।

मंगलमय गणना शुरू, भारत हुआ निहाल।।

 *

संवत्सर कितना शुभम्, देता सबको नेह !

अंतर इसका आसमय, उल्लासित है देह।।

 *

फिर से नव संकल्प हो, फिर से नव उत्थान।

हिन्दू होने की खुशी, जयति जय नव गान।।

 *

नया वर्ष ले आ गया, नया शौर्य, नव ताप ! 

संस्कारों के वेग को, कौन सकेगा माप।।

 *

राज विक्रमादित्य ने, दिया हमें नव वर्ष!

आगे हम बढ़ते रहें, धारण करके हर्ष।।

 *

चैत्र प्रतिपदा मांगलिक, बाँँट रही उत्साह।

बात तभी बन पायगी, बनो वक़्त के शाह !!

 *

दोस्त, मित्र, बंधू, सखा, रक्खो सँग नववर्ष।

मिले तुम्हें खुशियां “शरद”, मिले सुखद जीतो हर संघर्ष।।

 

© प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे

प्राचार्य, शासकीय महिला स्नातक महाविद्यालय, मंडला, मप्र -481661

(मो.9425484382)

ईमेल – khare.sharadnarayan@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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