श्री भगवान वैद्य ‘प्रखर’
☆ मराठी कविता – जन्म… – उज्ज्वला केळकर ☆ हिन्दी भावानुवाद – श्री भगवान वैद्य ‘प्रखर’ ☆
उज्ज्वला केळकर
अंतिम घड़ी निकट है
प्राणांतक वेदना से
फट गया है मस्तिष्क
भाग्य-रेखा
भूल चुकी है मार्ग अपना
घड़ी की टिक-टिक
जारी है
सांसों की सरगम सम्भालते हुए
ईथर के असर से बाधित है देह की नस-नस
आंखों के सामने छा रहे हैं काले पड़ते
लाल, हरे, पीले, नीले वृत्त
बढ़ते धुंधलके में हो रही
श्वेत-चकत्तों की लयबद्ध हलचलें
पैने रक्तपिपासू-हथियारों की
लंबाती जा रही है अशुभ परछाई
संज्ञा शून्य होते-होते
सब कुछ छूटता जाता है
खून में उमड़ रहीं
गुलबकावली के हास्य की लहरों से
मन भर जाता है
रोम-रोम सराबोर हो जाता है।
मूल लेखिका – -उज्ज्वला केळकर
संपर्क – निलगिरी, सी-५ , बिल्डिंग नं २९, ०-३ सेक्टर – ५, सी. बी. डी. – नवी मुंबई , पिन – ४००६१४ महाराष्ट्र
भावानुवाद – श्री भगवान वैद्य ‘प्रखर’
30, गुरुछाया कालोनी, साईंनगर, अमरावती 444607
संपर्क : मो. 9422856767, 8971063051 * E-mail: vaidyabhagwan23@gmail.com * web-site: http://sites.google.com/view/bhagwan-vaidya
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈






धन्यवाद… धन्यवाद, आभार।