☆ स्मृतिशेष प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी विशेष – अविस्मरणीय संस्मरण / अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि ☆
☆ साभार – स्मृतिशेष प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी के स्वजन-मित्रगण ☆
वरिष्ठ साहित्यकार, भगवतगीता, रघुवंश, मेघदूत के हिंदी काव्य अनुवादक, 40 से ज्यादा कृतियों के कवि, लेखक, आध्यात्मिक, राष्ट्र प्रेम की भावधारा के साहित्यिक रचनाकार पिताजी प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध का दुखद अवसान 99 वर्ष की आयु में आज 25 जुलाई को शाम 4 बजकर 50 मिनट पर हो गया है।
उन्होने शांति से अंतिम सांसे ली, और दिव्य स्थान को प्रस्थान कर गए हैं।
उन्होंने बच्चों के बच्चों के बच्चों के संग भी जीवन का भरपूर आनंद लिया। उनकी तीन पुत्रियां श्रीमती वंदना श्रीवास्तव, श्रीमती विभूति खरे, श्रीमती विभा निगम एवं एक पुत्र विवेक रंजन श्रीवास्तव हैं।
देशाटन और दुनियाँ में अनेक देशों का पर्यटन किया।
उन्हें भारतीय अनुवाद परिषद के शीर्ष सम्मान, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी से तथा कई संस्थाओं से सम्मानित किया गया। वे केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 1जबलपुर के संस्थापक प्राचार्य थे। उन्होंने गीता को जिया।
– विवेक रंजन श्रीवास्तव, भोपाल
♥♥♥♥♥
ई-अभिव्यक्ति के नियमित वरिष्ठ रचनाकार गुरुवर प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी के रूप में मैंने अपनी माध्यमिक शिक्षा के समय के अपने प्रथम प्राचार्य (केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक १ जबलपुर) को खो दिया।
विगत ९९ वर्ष के जीवन काल के उनके स्वजन – मित्रगण भाई श्री विवेक रंजन जी के परिवार के साथ इस दुखद घडी के सहभागी हैं।
जैसे ही भाई श्री विवेक रंजन जी द्वारा उनके अवसान की सूचना फेसबुक सहित सोशल मीडिया पर डाली गई तो 300 से अधिक लोगों ने प्रतिक्रिया में संवेदनाये व्यक्त की। अनेक लोगों ने व्हाट्सअप पर सीधे प्रतिक्रिया की। सोशल मीडिया से प्राप्त कुछ प्रतिक्रियाएं हम आपसे साझा करने का प्रयास कर रहे हैं।
हेमन्त बावनकर, पुणे
☆
आपसे एक माह पूर्व आशीर्वाद प्राप्त किया था, प्रो0 साहब आपको विनम्र श्रद्धांजलि एवं सादर नमन।
– इंजी ब्रिजेंद्र शंखवार
☆
वेमिशाल जीवनचर्या पूर्ण कर देवलोक गमन हेतु सादर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं आपके साहित्य में छिपे संदेशों से बहुत कुछ सीखने को मिला है। आपकी स्मृति सदा जीवंत रहेगी।
प्रभा विश्वकर्मा शील
☆
अत्यंत दुःखद समाचार.
ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को मोक्ष प्रदान करें व श्री चरणों में स्थान दें तथा परिजनों को इस महान दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें. ॐ शांति ॐ शांति 🙏
इंजी रवींद्र गर्ग
☆
अत्यंत दुखद सूचना है।
दादा जी
एक ऐसे व्यक्तित्व रहे, जिनका मन निर्मल और जीवन पारदर्शी रहा। सादर विनम्र श्रद्धांजलि 🙏
राजेश पाठक प्रवीण
☆
अत्यंत दुःखद समाचार है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। दुख की इस गहन घड़ी में परिजनों को संबल प्रदान करें। विनम्र श्रद्धांजलि. ओम शांति शांति शांति। 🙏
लक्ष्मी सिंग
☆
यह दुखद समाचार जानकर मन व्यथित हो गया। मैंने भी बाबूजी को बहुत करीब से देखा है। बहुत अच्छे साहित्यकार थे। लेकिन ईश्वर के विधान के सामने हम कुछ नहीं कर सकते। प्रभु से प्रार्थना है कि आप लोगों को सब्र और हौसला दे और दिवंगत आत्मा को शांति
सलमा खान
☆
बहुत दुखद समाचार 🙏 मेरी ओर से सादर नमन 🙏 हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें और परिवार को यह गहन दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें 🙏 ओम शांति शांति शांति 🙏
संजय वर्मा
☆
ओह्ह! 😢 विनम्र श्रद्धांजलि 💐
नईदुनिया जबलपुर में रहते उनका साक्षात्कार करने का अवसर मिला था। वो स्मृतियां हमेशा जीवित रहेंगी। ईश्वर पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान दें। 🙏🌺
राम कृष्ण गौतम
☆
ओह अत्यंत दुखद समाचार। अंकल को विनम्र श्रद्धांजलि। ॐ शांति 🙏
समीक्षा तैलंग
☆
दुखद समाचार है, पर शरीर की अपनी यात्रा होती है, लेकिन उस यात्रा में जो महान कार्य किया है उन्होंने वो सदा याद किया जाता रहेगा,
एक साहित्यकार ही नहीं थे बल्कि एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व के भी धनी थे वो, एक वटवृक्ष की भांति उन्होंने दोनों को संरक्षण दिया था, ऐसे महान व्यक्तित्व को भाव भरी श्रद्धांजलि, भगवान उन्हें अपनी शरण में लेकर उच्च आसन प्रदान करें, तथा शोकाकुल परिवार को उनके विछोह के दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें, विनम्र श्रद्धांजलि, ॐ शान्ति
अशोक श्रीवास्तव
☆
जो अंत्येष्टि में शामिल होगा,
वही पुण्य कमाऐगा!*
सतत् साधना में रत कविवर
की गंगा में नहाऐगा!!
मेरी उपस्थिति स्वीकारिऐगा
विदग्ध जी ॐ शाँति ॐ
ध्रुव कुमार गुप्ता
☆
एक शानदार मिलनसार व्यक्तित्व का अवसान बहुत दुखद है..विनम्र श्रद्धांजलि
युनुस अदीब
☆
अत्यंत दुःखद। पूज्य बाबूजी को विनम्र श्रद्धांजलि। ओम शांति 😔
हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि उनके द्वारा रचित नर्मदाजी की स्तुति को रिकॉर्ड करने का अवसर मिला। उनका आशीर्वाद सदैव अनुभव करते हैं, करते रहेंगे। 🙏🏼
प्रशांत सेठ
☆
भावपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि। बाबू जी का जीवन सादगी एवं विद्वत्ता की मिसाल था। शिक्षक पिता एवं कवि लेखक के रूप में उनकी यादें सदैव हृदय पटेल पर अंकित रहेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को परम गति प्रदान करे। एक युग का अंत हुआ।
पीयूष खरे
☆
अत्यंत दुःखद समाचार!
हम परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह श्रद्धेय सर की दिवंगत आत्मा को जन्म मृत्यु के बन्धन से मुक्ति दे और अपनी शरण में लें तथा परिवार के सभी सदस्यों को इस असीम दु:ख को सहन करने की सामर्थ्य प्रदान करे।
ॐशांति ॐशांति ॐशांति
निखिलेश निगम
☆
बेहद दुखद संस्कारधानी जबलपुर भी उनकी साहित्यिक कर्म भूमि रही है ऐसे ऊर्जावान साहित्य मनीषी का देवलोकगमन सभी के लिए व्यथित करने वाला समाचार है प्रभु से कामना है कि विवेकरजंन जी और परिजनों को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। श्रीजानकीरमण परिवार की ओर से सादर श्रद्धा-सुमन। ऊं शान्ति शान्ति शान्ति
डॉ अभिजात कृष्ण त्रिपाठी
☆
दुखद समाचार। आपके परिवार के विशिष्ट व्यक्तित्व का जाना आप सबके लिए बहुत कष्ट दायक है। ऐसे विद्वान का अवसान समाज के लिए भी बड़ी क्षति है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और पूरे परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे। ओम शांति शांति 🙏
शक्ति तिवारी
☆
हम खुशकिस्मत हैं आदरणीय बाबूजी का सानिध्य मिला। सदैव ऊर्जा, सकारात्मक विचारों और रचनात्मकता से ओत-प्रोत रहे। भावपूर्ण श्रद्धांजलि, ईश्वर पूज्यनीय बाबूजी की दिवंगत दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक-संतप्त् परिजनों को यह गहन दुःख सहन करने की शक्ति दे। 🙏🏼🌹 ॐ शांति 🌹🙏🏼
दीपक मालवीय
☆
अत्यंत दुखद खबर! भोपाल में होता तो आपके निवास पर पैदल चला आता! उन्हें सादर श्रद्धांजलि! उन्होंने पूरी जिंदगी स्वस्थ और सक्रिय रहकर जी, सादर नमन!
हरी जोशी
☆
अत्यंत शोक का विषय है, बाबूजी का सानिध्य मुझे भी मिला है. जब विवेक सर एम पी ई बी रामपुर मे बॉलीबाल ग्राउंड के सामने रहते थे, मैं सुबह टाइम कल्याण भवन के सामने से ऑफिस जाता था औऱ रास्ते मे उनके दर्शन हो जाते थे तो मैं स्कूटर रोककर उनके चरण छू लेता था. मैं घर भी जाता था. दुःखद समाचार है. ईश्वर उनकी आत्मा को अपने चरणों मे स्थान देवें. ॐ शांति… शांति… शांति…
मोहन श्रीवास
☆
अत्यंत ही दुखद समाचार है।
ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में उचित स्थान प्रदान करने की कृपा करें और विवेक श्रीवास्तव के पूरे परिवार को इस गहन आघात सहन करने की शक्ति दें।
विनम्र श्रद्धांजलि। ओम् शांति ओम् शांति ओम् शांति।
अनिल गर्ग
☆
अत्यंत दुःखद।
ईश्वर उनकी पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें और परिवार जनों को इस भीषण आघात सहन करने की शक्ति दें।
विनम्र श्रद्धांजलि। ॥ॐशांतिः॥
अनिल कुमार लखेरा
☆
कष्टदायक जीवन से बहुत श्रेष्ठ है भवसागर पार कर शांतिपूर्ण देहावसान कर परमेश्वर की प्राप्ति। जब सी बी साहब लगभग चालीस वर्ष के रहे होंगे तब से उनसे परिचय हुआ था नितांत शांत व्यक्तित्व सदा रचनात्मक कार्य में लगे रहना। जबलपुर के प्रांतीय शिक्षण महाविद्यालय से जब वे शनिवार रविवार अपने आवास पर मंडला आते तो सौभाग्य वश हम सामने ही रहते तो उन्हें प्रति बागवानी में व्यस्त देखते। अपने बच्चों के साथ मेरी बेटियों से भी अत्यंत मधुर और शिक्षाप्रद व्यवहार रहता था। सच मुच एक एक पल भीष्म पितामह का जीवन जीकर सार्थक किया उन्होंने। परिवार भी उनका उनके ही सम था। उनकी माताजी उनकी पत्नी स्व.दयावती जी हमारी शाला की प्राचार्य पुत्रियां उनकी बहू कल्पनाजी सभी परिचित अपने मधुर व्यवहार से ह्रदय जीतने वाले। पुत्र श्री विवेक रंजनजी को तो समस्त साहित्य जगत बहुत अच्छे से जानता ही है मैं क्या कहूं। एक सुपुत्र जिसकी जगत आकांक्षा करपताहै वे हैं। आदरणीय भाई को हार्दिक भावांजली। पूरे परिवार को सहानुभूतिपूर्वक सहनशक्ति की कामना। ॐ 🙏शांति। 🙏
नीलम भटनागर
☆
श्री विदग्ध जी का जन्म सन छब्बीस है निश्चय ही उन्नीस सौ। क्योंकि क्रूर काल ने दो हजार का छब्बीस तो आने नहीं दिया। तो उनकी माताजी बताती थीं कि उस साल मंडला जो कि उनका जन्मस्थान है में नर्मदा मैया में भयानक बाढ आई थी। आमजन जीवन अत्यंत त्रस्त था। रहने और भोजन का बहुत अभाव ऐसे में कुछ दयालु जन ने अपने निवास पर लोगों को आश्रय दिया। उनमें से विदग्ध जी के पिता और दादा ने भी यह उपकारी कार्य किया। बादमें उन सभी घरों को तत्कालीन कलेक्टर साहब ने महलात नाम दिया जो इनके घर पर पट्टिका के रूप में लगा था। एक महलात औरतो मैं जानती हूं वह वल्लभजी ओझा का घर था जो मंडला के बडे दानदाता और विधायक रहे। बाद में उनकी सुयोग्य बहू श्रीमती नारायणी देवी झा शायद तीन चार टर्म की विधायिका रहीं। वे भी अत्यंत लोकप्रिय थीं। मंडला आदिवासी बहुत पुरातन जिला क्षेत्र फल के हिसाब से बहुत विस्तृत जिला था। अमर कंटक से आती मांनर्मदा ने इसे तीन ओर से घेरा हुआ है। अतिप्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।
जो आज कायस्थ जन को चित्रांश नाम से नया नाम कहते हैं वे समझ लें कि इनका नाम तब श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव रखा गया जिसे उनने सार्थक किया अगाध साहित्य के रचयिता और अनुवादक रहे सी बी साहब की एक सहज सरल भूषण पर लिखी कविता यहां उनको भावाजलि के रूप में प्रस्तुत कर रही हूं जो उनके राष्ट्र प्रेम को व्यक्त करती है। –
यही हमारी .भारत माता।
जिसका. प्यार हमें हर्षाता।।
बडे सुहाने सांझ सकारे।
सूरजचांद चमकते तारे।।
कषक श्रमिकसैनिक व्यापारी।
कलाकार रक्षक व्यापारी।।
सब धार्मिक निश्छलसद्ज्ञानी।
ज्यों निर्मल गंगा का पानी।
युग युगे है इनका नारा।
प्रेम आपसी भाई चारा। ।
नील गगन धरती कल्याणी।
सुफल उर्वरा अनुपम दानी।।
जनता अधिक गांव में बसती।
उत्सव प्रिय संस्कृति जिनकी।।
शहरों मेंपर रोज़गार है।
दिल्लीदिल है कण्ठ हार है।।
विश्व गगन का उज्वलतारा।
ऐसा अनुपम देह हमारा।।
यह कविता उनके स्वच्छ पावन हृदय का दर्पण है। शायद अपने विद्यार्थी जीवन में लिखी थी जो मंडला के जनजीवन में बहुत लोकप्रिय थी। उन के संगी साथी जो अब बहुत कम ही होंगे उनके विषय में बहुत कुछ लिखेंगे पर मेरी जानकारी एक और महत्वपूर्ण घटना है वह है अंग्रेजों द्वारा स्वाधीनता सैनानियों पर बीच चौक पर गोली चालन है जिसमें प्रसिद्ध श्री उदयचंद जी की मृत्यु हुई उस समूह में जो छात्र गण थे उसमें भी श्री सी. बी. भाई साहब थे। मेरा तात्पर्य महज यह याद दिलाना है कि उदयचंदजी भी शायद तब न मारे जाते तो अभी भी अपने परिवार में होते। अभी इत्यलम। पुनः भाई साहब को हार्दिक श्रद्धांजली। ईश्वर उन्हें अपने चरणों में स्थान। दें। । 🙏🙏
मीना जौहरी
☆
भावपूर्ण श्रद्धांजलि आज उनके लिए जो लिखा है उसे पढ़कर बहुत सी यादें ताजा हो गई वे एक बार स्काउट गाइड का और एक बार फनीचर का आडिट करने आये थे तो देखते हुए बोले अरे तुम्हारा क्या देखे ठीक होगा लाओ साइन कर देते हैं सब याद आ रहा है विवेक का फोन नंबर देना बहुत पहले था अब कब से सम्पर्क नहीं हुआ है
रंजना मिश्रा
☆
प्रिय साथियों
आज आ. विवेक रंजन जी के पिताजी के असामयिक निधन पर मंच पर अवकाश रखा गया था।
इस दुखद घड़ी में हम सब विवेक रंजन जी के साथ हैं।
ईश्वर पिताजी की आत्मा को शांति प्रदान करें। 🙏 ऊँ शांति ॐ 🙏
मधूलिका श्रीवास्तव, गद्य प्रवाह मंच
☆
दुखद समाचार है। श्री विदग्ध जी की एक पुस्तक ईश आराधना जो मंडला में उन्होंने मुझे सप्रेम भेंट की थी, आज भी मेरी बुक शेल्फ में सुरक्षित रखी हैं। ईश्वर ऐसी महान विभूति को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। सभी परिजनों को इस अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। 🌹विनम्र श्रद्धांजलि 🌹
कमल चंद्रा
☆
प्रणाम
आज आपका जन्मदिन है हमें पूर्ण विश्वास है कि पूजनीय पापा जी बैकुंठ धाम से आपको देखकर गर्वित महसूस कर रहे होंगे कि उन्हें इस कलयुग में भी आपके जैसा श्रवण कुमार प्राप्त हुआ। आप और सुषमा दीदी परिवार के उच्च संस्कारों के उत्तम उदाहरण है।
इस कठिन समय में आपको जन्मदिन की शुभकामनाएं।
ईश्वर आपको हिम्मत और शक्ति प्रदान करें। सादर
श्वेता और तरुण
☆
विवेक भाई, आदरणीय अंकलजी के देहावसान का दुखद समाचार आज ही देखा। आपके परिवार की इस घड़ी में मुझे अपने साथ ही समझो। मैं जानता हूं कि पिताजी का आशीर्वाद आपके लिए एक आदर्श संबल रहा है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें एवं आप सभी परिजनों को यह आघात सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ओम् शांति।
हर्ष वर्धन व्यास
☆
विवेक जी !
आप सचमुच भाग्यशाली हैं। इतने वर्षों तक पिता की छत्र छाया जिसे नसीब हो उस पर साक्षात् प्रभु की अनुकम्पा ही बरसती है।
अपनों का बिछोह कष्टदायी होता है। मनुष्य बड़ा ही स्वार्थी जीव है। बिछुड़ना नहीं चाहता किन्तु यही शाश्वत सत्य है।
ईश्वर हमेशा आपके साथ रहे आप भी पिता श्री के सिखाए आदर्शों पर चल कर शिखर तक पहुँचें, यही ईश्वर से प्रार्थना है।
शतायु से कुछ समय पूर्व निधन शतायु होने का ही संकेत है। विनम्र श्रद्धांजलि 🙏
दुर्गा सिन्हा
☆
आप के पूरे परिवार पर ईश्वर की असीम अनुकंपा रही है, आप सभी भाई बहनों को ऐसे विद्वान विदूषी, कर्मठ और ईमानदार माता पिता प्राप्त हुए। पिता का निधन अपूरणीय क्षति है। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उन्हें सदा याद किया जाएगा।
मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। प्रभु आप सभी को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।🙏🙇♂️
राजीव कर्महे
☆
प्रिय भाई विवेक, आपके पिताजी के अवसान की जानकारी से बहुत दुःख हुआ। इश्वर् उन्हें अपने लोक में स्थान दे। परिवार में सब को यह दुःख सहन करने की शक्ति दे.
परमानंद सिंहा
☆
श्री विवेक रंजन जी,
प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव जी हमारे प्रथम प्रधान अध्यापक थे। उनके निधन से मैंने एक गुरू, पथ प्रर्दशक और एक अभिभावक को खो दिया। मैं उनके श्री चरणों में अपना प्रणाम अर्पित करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वे उनकी आत्मा को चिर शांति प्रदान करे। साथ ही आप सभी को इस दुःख के समय संबल प्रदान करें। ॐ शान्ति शान्ति शान्ति।
अनूप बोस
1969 पास आउट केंद्रीय विद्यालय क्रमांक एक जबलपुर
☆
Dear Mr Vivek Ranjan Shrivastava ji…Very Sad to know about the demise of Respected Guru Ji Professor C B Shrivastava Ji.
Our deep heartfelt Condolences to you & all the family members with the prayers to almighty God to give eternal peace to the departed Soul. God may give enough strength to all the family members to bear this loss. 🕉 SHANTI 🕉
Avinash Goel & Family, Bangalore
☆
अत्यंत दुःखद साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति।
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः
अशोक सिंहासने, बालाघाट
☆
..Babbaji lived 99 years with dignity, curiosity, a sharp and beautiful mind. But the quality of his life, the peace he had in his final days and the love he left with all of that was because of you. Your devotion, your patience and the way you put his needs above your own every single day is something I will carry with me forever.
Both of you have dedicated your lives to honouring him. He was truly a fortunate man.
In the quiet, often unseen moments adjusting his body, preparing his food, anticipating even the smallest needs you gave him a kind of care that few people in this world ever receive. And even at the very end, he wasn’t alone. He left in peace, held by the love of the two people who never left his side.
We will carry the lessons he gave us within us and pass them on to the generations that follow. He was endlessly curious, always eager to learn more about the world. He had clarity of thought, emotional control, and a deep hunger for knowledge. These are truly rare traits that I aspire to take forward from him.
Thank you for giving him such a beautiful life. And thank you for showing me what it truly selfless service means. I can’t imagine another soul as lucky as him or other children as self-sacrificing and noble as you both.
I love you both so much.
Anubha, London
ब्रम्हलीन आदरणीय प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव का देवलोक गमन शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र की अपूरणीय क्षति है। गरिमामय और सम्माननीय जीवन यात्रा पूरी कर अत्यंत सक्रिय और क्रियाशील स्थिति में स्वर्गारोहण भाग्यशाली व्यक्तियों को ही मिलता है। आदरणीय श्रीवास्तव साहब ऐसे ही परम भाग्यशाली थे।
अपनी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के रूप में प्रख्यात साहित्यकार अपने पुत्र श्री विवेक रंजन जी श्रीवास्तव को अपना उत्तराधिकार सौंप गए है। ऐसे महामना को ईश्वर मोक्ष प्रदान कर अपने चरणों में स्थान दे और श्रीवास्तव परिवार को इस दारुण दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
डॉ प्रो जे सी श्रीवास्तव
☆
२५ जुलाई २०२५
प्रिय विवेक रंजन,
स्नेह
आप भाग्यशाली बेटे हैं कि आपको आपके पिताश्री पूजनीय चित्र भूषण जी अपनी उम्र के ९९ वर्ष तक रोज आशीर्वाद देते रहे. उनके मार्गदर्शन के umbrella में आपने उत्कृष्ट उपलब्धियां प्राप्त की. उनके निधन से अब एक बड़ा vaccume create हो गया है. मुझे लगता है – आप आज से बड़े हो गए हैं. पिता के रहते हम बड़े होते नहीं हैं. उनके दुलार प्रेम अनुशासन में बच्चे ही बने रहते हैं.
आदरणीय भाई साहब श्री चित्र भूषण जी से मेरा परिचय आधी सदी का है, मैंने उन्हें विभिन्न पदों पर निष्ठा, ईमानदारी, कर्मठता, एवं पारदर्शी कार्य प्रणाली से कार्य करते देखा है, मैं DPI Office में रहा. वे भोपाल आने पर पहले मुझसे मिलने मेरे घर आते रहे हैं. मुझे उनका स्नेह मिलता रहा. हम साहित्यिक विषयों पर भी चर्चा करते थे. विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने हिंदी साहित्य जगत में प्राय सभी विधाओं पर लेखन कर प्रतिष्ठा प्राप्त की. मैं उनकी स्मृति को प्रणाम करता हूँ.
महेश सक्सेना
☆
ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से स्मृति शेष स्मृतिशेष प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी को विनम्र श्रद्धांजलि
☆ ☆ ☆ ☆
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर / सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






