श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “झूमके आया सावन…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २७७ ☆
☆ # “झूमके आया सावन…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆
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झूम के आया सावन
बरसे बरखा रानी
प्यासी प्यासी धरती
मेघों की है दीवानी
कारे बादर घूम रहे हैं
धरती को चूम रहे हैं
मदहोशी में झूम रहे हैं
धरती मेघों के मिलन से
बरस रहा है पानी
झूम के आया सावन
बरसे बरखा रानी
फूलों के लगे हैं मेले
झूलों के लगे हैं मेले
तरुणाई आंख मिचोली खेलें
सावन के गीत गाए
मदमस्त है जवानी
झूम के आया सावन
बरसे बरखा रानी
बूंदों का श्रृंगार है
आंखों में प्यार है
साजन का इंतजार है
प्रियतम की राह तकते
ओढ़ी चुनरी है धानी
झूम के आया सावन
बरसे बरखा रानी
मेघों की मनमानी है
बारिश भी तूफानी है
नगरी डूब ही जानी है
अहंकार के पतन की
यही है कहानी
झूम के आया सावन
बरसे बरखा रानी
प्यासी प्यासी धरती
मेघों की है दीवानी /
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© श्याम खापर्डे
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