प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे
☆ लघुकथा – मुंह पर थप्पड़ ☆ प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे ☆
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यह जानते ही मानसी ने जयंत को फोन किया।पहले तो जयंत ने मानसी का फोन अटैंड नहीं किया, और जब फोन उठाया तो सीधे जवाब देने की बजाय टालमटोली करता रहा, औरजब मानसी ने सीधे सीधे सवाल किया कि, “जयंत तुम यह बताओ कि वह तुम्हारे जो चाचाजी दहेज की सूची दे गए हैं, तो वह क्या तुम्हारी जानकारी में है?”
“हां! है तो ।”
“क्या, तुम उससे सहमत नहीं ?”
“नहीं।”
“मतलब असहमत हो?’
“नहीं, मैंने ऐसा तो नहीं कहा।”
“मतलब यह , कि वह सूची मेरे पापा व चाचा ने बनाई है, तो सहमत न होते हुए भी मुझे मानना पड़ेगा।—-और फिर इसमें बुराई भी क्या है, आख़िर तुम्हारी शादी आय.ए.एस. से जो हो रही है।इसमें तुम्हारे जीवन के शान व सुख-सुविधा से गुज़रने की गारंटी भी तो है।”
“मतलब, यह तुम लोगों का अंतिम फैसला है ?”
“हां!ऐसा ही समझो।’
“और हमारे प्यार का क्या ?”
“वह तो हमने तब किया था, जब मैं आय.ए.एस. नहीं था। ”
“ओके!तो मैं इस रिश्ते को अभी ख़त्म करती हूं।मुझे नहीं करना दहेज के लालचियों के घर अपना रिश्ता।”
और फुंफकारती हुई मानसी चली गई, और जुट गई जी-जान से यू.पी.एस.सी. की तैयारी करने में।
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© प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे
प्राचार्य, शासकीय महिला स्नातक महाविद्यालय, मंडला, मप्र -481661
(मो.9425484382)
ईमेल – khare.sharadnarayan@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





