श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘क्या-क्या लिखूं…?‘।)
☆ अभिव्यक्ति # ९३ ☆ क्या-क्या लिखूं…? ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
लिखना चाहता हूं,
पर क्या लिखूं,
यादें, बचपन की,
क्या होगा उससे,
रिक्तता आ जाएगी,
सामने जहां हम,
जा नहीं सकते,
उन यादों को,
याद करने से क्या होगा,
बस याद ही आएगी,
बचपन के दोस्तों की,
बचपन की शैतानियों की,
बचपन में खेले गए खेलों की,
और पूरे बचपन की,
पढ़ाई के लिए निकलना,
स्कूल जाते वक्त,
रास्ते में बैठ जाना,
लंच बॉक्स खत्म कर देना,
और छुट्टी के वक्त,
स्कूल से वापस आ जाना,
क्या-क्या लिखूं,
क्या क्या याद करूं,
यादों में तो सब है,
पर लिखना नहीं चाहता,
क्यों लिखना है,
जब वह मिल ही नहीं सकता,
आशा और विश्वास की,
एक डोर बंधी हुई,
उन यादों से बस बंधे ही रहें,
लिखने की जरूरत नहीं है.
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर
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