डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “संविधान खोलकर…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # २१
कविता – संविधान खोलकर… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
=1=
हम बाँटने वाले हैं अपना, ज्ञान खोलकर
ध्यान से सुनियेगा अपने, कान खोलकर
=2=
तज़ुर्बे की क़िताब में, खुलकर ये लिखा है
चोरों को न दिखाना, तुम मकान खोलकर
=3=
पाखण्ड – ढोंग, उसके लिए पूजनीय है
जिसने पढ़ा-लिखा नहीं, विज्ञान खोलकर
=4=
वादों में-प्रलोभन दे, कटपीस बाँटकर
पूरा का पूरा ले गये, वे थान खोलकर
=5=
सारे ज़हाँन के रचा, जिसने मकाँ-दुकाँ
बैठे हैं लोग उसी की दुकान खोलकर
=6=
निज आन-बान-शान-स्वाभिमान के लिए
खींच ले तलवार अपनी, म्यान खोलकर
=7=
‘राजेश’ वन्दे मातरम्, उन्हीं को ख़ल रहा
पढ़ा नहीं जिन्होंने, संविधान खोलकर
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071
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