डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “बदलता है“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता – # २२ ?

? बदलता है… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

=1=

न भ्रष्टाचार बदलता, न ही प्यार बदलता है

दोनों स्थितियों में, बाबू-यार बदलता है

=2=

दंगे आगजनी किडनैप रेप साजिश मर्डर

ख़बरें लगभग रोज़ वही, अख़बार बदलता है

=3=

इंतज़ार इक़रार वफ़ा की बातें करता जो

वो शायर अक़्सर अपना अशआर बदलता है

=4=

घुटता जो अन्दर-अन्दर, घर-द्वार की उलझन में

बाहर-बाहर वो काशी-हरिद्वार बदलता है

=5=

तिल-तिल गला रही उसको, रोजगार की चिंता

सपने में वो सपनों का, संसार बदलता है

=6=

मन की बात कहूँ, मतदाता मन ही मन सोचे

वो मन ही मन मनचाही सरकार बदलता है

=7=

‘राजेश’ उससे न्याय की उम्मीद मत करो

जो लीडर नित, नये-नये दरबार बदलता है

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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