श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “मुहब्बत का असर तो देखिए …“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १४२ ☆
मुहब्बत का असर तो देखिए… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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जरा सी हैसियत बढ़ते ही माज़ी भूलने लगते
मगर हरकत से ये ज़रदार फौरी है बने लगते
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जो अपनी हैसियत से उठाते वज़्न हैं बढ़चढ़
उन्हीं के पाँव चादर से निकलकर झाँकने लगते
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मुहब्बत का असर तो देखिए वो दूर है मुझसे
मगर हर वक़्त आँखों के मुझे है सामने लगते
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जिन्होंने ज़िन्दगी की धूप में देखा नहीं तपके
यही वो लोग है जो मुश्किलों से भागने लगते
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बुजुर्गों की करो इज्ज़त तज़ुर्बों का खजाना है
मगर बूढ़ा समझ कर लोग रुख को मोड़ने लगते
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उधारी प्रेम की कैची है जिसने भी कहा सच है
बिगड़ता रब्त है जब भी उधारी माँगने लगते
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नए इस दौर के मुंसिफ अना का पास भूले है
नहीं दोगे जो नज़राना ये पेशी टालने लगते
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भले दुश्मन है ऐसे दोस्त से जो घात में रहकर
गले मिलते ही देखा है की गर्दन नापने लगते
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भलाई का अरुण अंजाम दुनिया में यही देखा
मसीहा जो बना उसमें ही कीलें ठोकने लगते
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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