सुश्री इन्दिरा किसलय
☆ लघुकथा ☆ लाक्षापथ… ☆ सुश्री इन्दिरा किसलय ☆
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ताजा ताजा पिघले कोलतार से सड़क बनी है। सड़क यानी सुविधा।सड़क यानी विकास। जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक गवाही दे रहा है। पर नन्हा चुरुंगुन( चिड़िया का बच्चा) कुछ नहीं जानता ।मनुष्य की बनाई दुनिया के नियमों से अनजान।हर सड़क, हर तरह के लोगों के लिए नहीं होती।चुरुंगुन- पगडंडी, सड़क और राजपथ के बीच फर्क नहीं समझता।
वह जैसे ही सड़क पर आकर बैठा, पिघले हुए कोलतार में उसका पाँव फंस गया।उसने निकालने की खूब चेष्टा की, पंख फड़फड़ाए , शरीर झटका पर पाँव न निकला। वह नन्ही सी चोंच खोले जोर -जोर से च्यूंक-च्यूंक करने लगा ।उसकी दशा देखकर एक युवक का मन करुणा से भर गया।
वह झुका और उसने धीरे-धीरे कोलतार में फँसा हुआ उसका पांव निकाला ।चुरुंगुन पलक झपकते ही उड़ गया। वह जाने कहाँ चला गया।
युवक ने राहत की साँस ली ।काली सड़क थी, भूरा चुरुंगुन इसलिए झट से नज़र आ गया वर्ना किसी गाड़ी के नीचे या किसी के पाँव तले कुचला जाता ।
युवक सड़क को देखते हुये मन ही मन सोच रहा था– लाक्षापथ की जानकारी सभी को नहीं होती न ।
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© सुश्री इंदिरा किसलय
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈



