श्री अरुण कुमार दुबे

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “जबसे आया है हुनर ये शाइरी का“)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १४८ ☆

✍ जबसे आया है हुनर ये शाइरी का… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे 

आशिक़ी समझी इबादत ख़ुश पयंबर हो गया

बर्फ जैसा इश्क़ के दरिया का आज़र हो गया

 *

जबसे आया है हुनर ये शाइरी का कुछ मुझे

बोलता हिंदी फ़िदा उर्दू पे जी भर हो गया

 *

होती थी वाइज़ की इज्ज़त  ख़ास पहले सच यहाँ

अब गिरा किरदार से तो जेल में घर हो गया

 *

था हवेली जैसा पहले भाइयों  में  जब बँटा

जाल दीवारों का मेरे घर के अंदर हो गया

 *

अब सियासत में शराफ़त का न कोई काम है

जिसको अय्यारी न आई है वो बाहर हो गया

 *

नाम होते जो नदी नाला न बन उफना रहा

अपनी हद में रहके वो दिल से समुंदर हो गया

 *

खैर दुनिया की नहीं इससे बचाये अब ख़ुदा

उस्तरा ले हाथ में हज्जाम बंदर हो गया

 *

देव देवों का नहीं ऐसे ही कहते है सभी

शिव पिया विष खैर-ए-आलम को महेश्वर हो गया

 *

जिसको अंतर है नहीं अपने पराये में कोई

अय अरुण यह मान ले अब वो कलंदर हो गया

© श्री अरुण कुमार दुबे

सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश

मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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