श्री जगत सिंह बिष्ट

(Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.)

🌿 यात्रा संस्मरण –  अनन्त की गोद में: देवभूमि की एक यात्रा 🌿

कुछ यात्राएँ हमें स्थानों तक ले जाती हैं… और कुछ ऐसी होती हैं जो हमें भीतर की ओर ले चलती हैं। उत्तराखण्ड की पावन धरती—देवभूमि—की मेरी यह यात्रा निस्सन्देह मुझे अध्यात्म की गहराई में लेकर गई।

लगभग डेढ़ महीने तक, जीवन ने पहाड़ों, हिमनदों और नदियों की लय पकड़ ली। घुमावदार पहाड़ी रास्ते कभी-कभी धैर्य की परीक्षा लेते, पर हर मोड़ पर प्रकृति अपना नया रूप दिखाती—बर्फ से ढकी चोटियाँ मौन वैभव में खड़ी, और साथ बहती पवित्र नदी जैसे सदा साथ निभाने वाली सहचरी।

मन बार-बार पूछता रहा—इस भूमि में इतने मंदिर, कथाएँ और आस्थाएँ कैसे समायी हैं? शायद इसका उत्तर ग्रन्थों में नहीं, इस भूमि की हवा में है—जहाँ हर श्वास स्वयं एक प्रार्थना बन जाती है।

🌊 ऋषिकेश: जहाँ मौन बोलता है

हिमालय की तराई में बसा ऋषिकेश, पावन गंगा के तट पर, हमें अपने शांत आलिंगन में ले लेता है।

मेरी पत्नी राधिका, परमार्थ निकेतन आश्रम में, एक गहन योग-प्रशिक्षण में प्रतिभागी थीं—उनका दिन भोर से आरम्भ होकर देर रात्रि में समाप्त होता। और मुझे मिला एक दुर्लभ वरदान—कुछ न करने का मधुर सुख।

सुबह मैं गंगा के किनारे बैठता, जल की लहरों को प्रथम किरणों में झिलमिलाते देखता। वहाँ, उस निःशब्दता में, विचार धीरे-धीरे शांत हो जाते और समय जैसे थम सा जाता। ध्यान स्वयं ही घटित होने लगा।

रविवार की एक सहज पदयात्रा हमें भूतनाथ मंदिर तक ले गई, जहाँ से गंगा और ऋषिकेश का दृश्य किसी स्वप्न सा प्रतीत हुआ—मानो नदी धरती और आकाश को एक सूत्र में पिरो रही हो।

🕉️ हिमालय का आह्वान

योग-प्रशिक्षण पूर्ण होते ही, मन हमें और भीतर—हिमालय की गोद में बसे उन पवित्र स्थलों की ओर खींच ले गया, जिन्हें देखने की चाह वर्षों से थी। पंच प्रयाग, जहाँ नदियाँ मिलकर एक हो जाती हैं, हमें बुला रहे थे।

🔱 गुप्तकाशी और उखीमठ: प्रार्थनाएँ सबके लिए

गुप्तकाशी में प्राचीन विश्वनाथ मंदिर, काशी की स्मृति जगाता है, और अर्धनारीश्वर मंदिर शिव और शक्ति के दिव्य संतुलन का प्रतीक है।

यहाँ हमने प्रार्थनाएँ कीं—अपने लिए, अपने परिवार और मित्रों के लिए, और उन पूर्वजों के लिए जो अब हमारे बीच नहीं हैं। ऐसा लगा मानो समय की सीमाएँ मिट गई हों और अतीत व वर्तमान एक ही क्षण में समा गए हों।

उखीमठ में ओंकारेश्वर मंदिर की संध्या आरती अत्यन्त भावपूर्ण थी। दीपों की ज्योति जब संध्या आकाश से मिलती, तो ऐसा लगता मानो दिव्यता साक्षात् उपस्थित हो।

💍 त्रियुगीनारायण: जहाँ प्रेम शाश्वत हुआ

त्रियुगीनारायण, वह पावन स्थल जहाँ मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।

वहाँ आज भी होते विवाहों को देखना अद्भुत था—मानो समय ठहर गया हो और हर युगल उस दिव्य मिलन का आशीर्वाद पा रहा हो।

🏔️ चोपता से जोशीमठ: शिखरों और सरलता के बीच

आगे बढ़ते हुए चोपता के हरे-भरे मैदान, दूर चमकते हिमनदों के साथ, किसी स्वप्न से कम नहीं लगे।

जोशीमठ में नृसिंह मंदिर का वातावरण अत्यन्त शांत था। परन्तु सबसे मनमोहक दृश्य था—मंदिर प्रांगण में छोटे बच्चों का उत्साहपूर्वक क्रिकेट खेलना। कोई रोकटोक नहीं। बच्चों को निर्भीक होकर खेलने का अवसर मिलना ही चाहिए।

उस क्षण, पवित्रता और सहजता का सुंदर संगम देखने को मिला।

🌳 ज्योतिर्मठ: समय से संवाद

आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ, मानो समय की सीमाओं से परे है।

वहाँ स्थित प्राचीन कल्पवृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान करना एक अद्भुत अनुभव था। समीप की गुफा ने हमें भीतर की यात्रा पर आमंत्रित किया।

कुछ स्थान ऐसे होते हैं जहाँ मौन रिक्त नहीं होता—वह पूर्ण होता है। यह उन्हीं में से एक था।

🌊 पवित्र संगम: जहाँ नदियाँ एक हो जाती हैं

हर प्रयाग एक पावन कथा सा प्रतीत हुआ—

विष्णुप्रयाग में धौली गंगा और अलकनंदा का आलिंगन,

नन्दप्रयाग में नन्द बाबा और कृष्ण की स्मृतियाँ,

कर्णप्रयाग में महाभारत के कर्ण की तपस्या की छाया,

रुद्रप्रयाग में जल को स्पर्श कर आरती करने का अप्रत्याशित सौभाग्य।

हमारे कक्ष से नीचे दिखता संगम, एक जीवंत चित्र सा प्रतीत होता था।

धारी देवी मंदिर में भोर का पहला दर्शन और आरती—अत्यन्त दिव्य और आत्मीय अनुभव।

🌺 देवप्रयाग: अलकनंदा और भागीरथी का संगम

देवप्रयाग में, जहाँ भागीरथी और अलकनंदा मिलकर गंगा का स्वरूप लेती हैं—वहाँ पहुँचकर मन स्वतः ही मौन हो गया।

दो नदियों का यह मिलन, जीवन का एक गहरा रूपक प्रतीत हुआ—दो यात्राएँ, जो मिलकर एक ऐसी धारा बनती हैं जो असंख्य जीवनों का आधार बनती है।

नेत्र अनायास ही नम हो उठे—यह भाव केवल अनुभव किया जा सकता है।

🌺 सुरकण्डा देवी और लाखामण्डल: आस्था की अनुगूँज

सुरकण्डा देवी मंदिर की चढ़ाई और मार्ग में दिखते हिमालय के दृश्य मन को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। राधिका की यह वर्षों पुरानी इच्छा थी, और वहाँ पहुँचकर जो दिव्य अनुभूति हुई, वह शब्दों से परे है।

लाखामण्डल मंदिर में संध्या आरती के समय गाँव के बच्चों की उल्लासपूर्ण सहभागिता ने मन मोह लिया। पास ही बहती यमुना के किनारे उनका क्रीड़ांगन और खेल के प्रति जोश, एक सजीव उत्सव सा प्रतीत हुआ।

🌄 यात्रा जो अभी शेष है

लौटते समय हमारे पास कोई भौतिक स्मृति नहीं थी—केवल एक गहन तृप्ति थी। यह अनुभव कि जीवन स्वयं एक तीर्थयात्रा है।

अब भी एक पुकार शेष है—भागीरथी के साथ चलने की, पंच केदार और पंच बद्री की यात्रा करने की।

ईश्वर हमें सामर्थ्य दे कि हम इन आकांक्षाओं को पूर्ण कर सकें।

तब तक, हिमालय हमारे भीतर ही बसा रहेगा।✨

#देवभूमि #उत्तराखण्ड #आध्यात्मिकयात्रा #हिमालय #गंगा #प्रकृतिप्रेम #आत्मअनुभूति #योगऔरध्यान #भारत_की_आत्मा

© श्री जगत सिंह बिष्ट

साधक

LifeSkills

A Pathway to Authentic Happiness, Well-Being & A Fulfilling Life! We teach skills to lead a healthy, happy and meaningful life.

The Science of Happiness (Positive Psychology), Meditation, Yoga, Spirituality and Laughter Yoga. We conduct talks, seminars, workshops, retreats and training.

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments