श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “मच्छर, छिपकली और मनुष्य।)

?अभी अभी # ९६८ ⇒ आलेख – मच्छर, छिपकली और मनुष्य ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

जीवः जीवस्य भोजनम् ! मनुष्य को मच्छर खाता है, तो मच्छर को छिपकली। अपनी आबादी को बचाने के लिए और सुरक्षित रखने के लिए, मच्छरों और छिपकली पर नियंत्रण जरूरी है इसलिए मनुष्य युद्ध स्तर पर घरों में पेस्ट कंट्रोल करवाता है और मच्छरों, कॉकरोच और छिपकलियों से एकमुश्त छुटकारा पाता है।

एक मच्छर मनुष्य को पूरा नहीं खा सकता। कहां मच्छर और कहां मनुष्य ! लेकिन जिस तरह पुष्टि के लिए मनुष्य रोज रात को एक ग्लास दूध का सेवन करता है, एक अंडे के लिए जिस प्रकार मुर्गी को नहीं मारा जाता, कुछ बूंद खून की ही मच्छरों की पुष्टि वर्धनम् के लिए पर्याप्त होती हैं।

मच्छर भी समझदार है, वह सोने की मुर्गी को हलाल नहीं करता। रोज रात को उसे दुहा करता है, यानी उसका आसान किस्तों में लहू पिया करता है।।

रात को मेरा कमरा, धर्मक्षेत्र, कुरुक्षेत्र हो जाता है। जिस प्रकार सात तालों में भी मौत प्रवेश कर जाती है और यमदूत जिसके प्राण लेना होते हैं, लेकर निकल ही जाते हैं, एक मच्छर सभी सुरक्षा प्रयासों के बावजूद और cctv कैमरे की नजरों के सामने रात्रि-दहाड़े कमरे में प्रवेश कर ही जाता है। एक मच्छर के लिए वैसे क्या दिन और क्या रात। क्या अंधेरा और क्या उजाला। उसने तो गंदगी और अंधेरे में ही अपने परिवार को पैदा किया, और पाला।

मच्छर प्रकाश में नृत्य करते हैं, मनुष्य का इंतजार करते हैं। मनुष्य के पास कई सुरक्षा कवच हैं मच्छरों के हमले से बचने के लिए। मच्छरदानी, ओडोमॉस, ऑल आउट और हिट। फिर भी मच्छर रणछोड़ नहीं। डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया इसके प्रमाण हैं।।

रात के बारह बजे हैं। कुछ मच्छर प्रकाशोत्सव में नृत्य का आनंद ले रहे हैं। कमरे में एक शिवजी की बड़ी तस्वीर लगी है जिनके भाल में चंद्र और जटाओं में गंगा को अभय मिला हुआ है।

सर्प भी सुरक्षित है नागेश्वर के गले में। बस इसी त्रिपुरारी की तस्वीर की आड़ में एक छिपकली ने भी शरण ले रखी है। जब भी कोई मच्छर उसके दायरे में आ जाता है, उसका भोजन बन जाता है।

मछली की आंख की तरह छिपकली और मच्छर के बीच कोई नहीं आ सकता। पूरे कमरे में वह बेखौफ मच्छरों का शिकार करा करती है। मच्छर मेरा शत्रु भी है। इस प्रकार वह मेरी भी शुभचिंतक ही हुई। मेरी कोप दृष्टि से बचने के लिए वह शिवजी की शरण में चली जाती है। छिपकली वहां छिपकर उतनी ही सुरक्षित है जितनी फूलों के बीच एक कली।।

स्वास्थ्य और सुरक्षा मनुष्य की पहली आवश्यकता है। बढ़ती जनसंख्या भी एक चेतावनी है। जनसंख्या नियंत्रण भी मनुष्य के लिए उतना ही जरूरी है। लेकिन उसके भी पहले बीमारियों की रोकथाम के मच्छर, छिपकली और कॉकरोच का इलाज भी जरूरी है। कंट्रोल कंट्रोल ! बर्थ कंट्रोल के पहले पेस्ट कंट्रोल..!!!

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments