श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘वो मेरा मार्गदर्शक…‘।)
☆ शशि साहित्य # ३२ ☆
कविता – वो मेरा मार्गदर्शक… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
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एक पूरा समुद्र उफान पर है दिल में मेरे,
एक बूंद को भी आंसू बनने से रोका है मैंने…
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जज्ब कर ली है, कठोरता सारे जहान की,
खुद को मोम की तरह पिघलने से रोका है मैंने…
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परख लिया है, पहले हर एक पैमाने को,
खुद से रूबरू होने का, फिर फैसला लिया मैंने…
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सिर्फ,फूलों सी नाजुक, पावन मुस्कुराहटें रोकती है मुझे,
और सारे बंधनों से खुद को आज़ाद कर लिया मैंने…
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ना कर कोशिश, कि टूट कर जर्रा जर्रा हो जाऊं,
टूट कर लाख गुना हो जाना खुद का, चुन लिया मैंने…
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उंगली पकड़कर जब “वो ” करें अगुवाई मेरी…
हर फिक्र को धुआं धुआं कर लिया मैंने…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






