डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “ख़्वाहिश“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ४४ ?

? कविता – ख़्वाहिश… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

=1=

चादर बड़ी करूँ मैं या ख़्वाहिश दफ़न करूँ

फाक़ाकशी में कैसे मैं पूरे सपन करूँ

=2=

हौसला इतना मुझे परवरदिगार दे

ले ज़ान हथेली पे मैं सर पे कफ़न करूँ

=3=

मन मेरा मेहताब सा ठण्डक लिए रहे

दिल में हमेशा आफ़ताब सी तपन करूँ

=4=

देश की माटी की हिफ़ाज़त के वास्ते

मैं बर्फ़ खुद को तो कभी खुद को अगन करूँ

=5=

जो मुझको ज़ख्म दे मैं लगाऊँ उसे गले

ये भूल बार-बार मैं तो आदतन करूँ

=6=

लीज में तुम मुझको अपना दिल ये सौंप दो

ताकि यारा प्यार का मैं उत्खनन करूँ

=7=

आने की तेरे दिल में जो गली है तंग है

मैं चाहकर भी किस तरह आवागमन करूँ

=8=

जिस माटी में जन्मे पले बढ़े बड़े हुए

उस मादरे वतन को मैं निश-दिन नमन करूँ ll

=9=

‘राजेश’ अपनी ग़लतियाँ दोहराऊँ न कभी

मुझसे न दिल दुखे किसी का, ये जतन करूँ ll

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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