श्रीमती अर्चना द्विवेदी ‘गुदालू’

(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती अर्चना द्विवेदी ‘गुदालू’ जी का ई-अभिव्यक्ति में हार्दिक स्वागत। शिक्षा – स्नातकोत्तर (समाज शास्त्र ए हिंदी साहित्य), सम्मान – अनेक साहित्यिक सम्मान से अलंकृत। प्रकाशन – साझा संकलन एवं पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित,आकाशवाणी में काव्यपाठ। सम्प्रति – गृहणी, श्रोता एवं रचनाकार।  अभिरुचि साहित्य, संगीत, प्रकृति, देशाटन। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – आस्था।)

☆ लघुकथा ☆ आस्था ✍ श्रीमती अर्चना द्विवेदी ‘गुदालू’ 

मोहल्ले के बच्चों ने चंदा जोड़कर पंडाल में गणेश जी को स्थापित किया। दिन भर पूजा-आरती और भजन गूँजते।

लेकिन रात के बारह बजते ही बच्चों की असली महफिल सजती। ताश खेलने के लिए जगह कम पड़ी, तो सबने हाथ जोड़कर बप्पा से क्षमा मांगी और उनकी मूर्ति को धीरे से कोने में सरका दिया।

सुबह होते ही बच्चों ने फुर्ती दिखाई, बप्पा को वापस  यथास्थान  सजाया और अगरबत्ती सुलगा दी।

© श्रीमती अर्चना द्विवेदी ‘गुदालू’ ‘✍️

निवास – जबलपुर मध्यप्रदेश मो – 9329931303

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted