श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए साप्ताहिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “ह र क त…“।)
अभी अभी # 716 ⇒ ह र क त
श्री प्रदीप शर्मा
हरकत एक ऐसी सूक्ष्म अथवा स्थूल प्रक्रिया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कहीं कुछ ऐसा चल रहा होता है, जिसका हमें आभास तक नहीं होता। लेकिन अगर किसी ने तनिक इशारा भी कर दिया, तो हमारे कान खड़े हो जाते हैं।
हरकत को स्वस्थ गतिविधि नहीं माना जाता ! अबोध बालकों की कुछ हरकतें गंदी होती हैं, जिनके लिए माता पिता उन्हें अक्सर झिड़कते रहते हैं। बाथरूम में बंद करने तक की धमकी भी देते हैं।।
पक्ष और विपक्ष की अक्सर हरकतें ओछी होती हैं। पाकिस्तान की घुसपैठ की गतिविधियां भी इसी श्रेणी में आती हैं। अपराधियों के कारनामों की गिनती नीच हरकतों में होती है। कभी कभी किसी अपने की भी कोई हरकत इतनी नागवार गुजरती है कि मन खट्टा हो जाता है। मोहल्ले के कुछ लफंगे टाइप के लड़कों की हरकतों से शरीफ महिलाओं का घर से निकलना दूभर हो जाता है। चीन की यह कोरोना वाली हरकत से तो, अब चीन क्या चाईनीज तक से नफ़रत हो गई है। आज की परिस्थिति में आप ट्रंप को हरकतबाज कह सकते हैं।
फिल्म हकीक़त का एक खूबसूरत सा गीत है :
ज़रा सी आहट जो होती है
तो दिल सोचता है,
कहीं ये वो तो नहीं !
जी नहीं। हकीकत तो यह है कि आहट का हरकत से कोई लेना देना नहीं। आपने कभी सांप के सरसराने की आवाज़ सुनी है, इसमें कोई आहट नहीं, झाड़ियों में हरकत सी होती है। सांप के चलने से सिर्फ हरकत होती है, बाहर भी, और अपने अंदर भी। मत पूछिए कैसी। हल्की हल्की बयार से पेड़ पौधों में, पत्तियों में एक हरकत होती है। जो देखी जा सकती है, महसूस की जा सकती है।।
आप जब किसी पड़ोसी के आंगन से कुछ फूल तोड़ने की इजाजत मांगते हैं, तो उसका जवाब होता है, कोई हरकत नहीं, आप जितने चाहें तोड़ लीजिए। हरकत यानी उज्र भी होता है। नो ऑब्जेक्शन। नो प्रोब्लम।
आइए, अब एक संयुक्त परिवार का हाल लेते हैं ! सबके चहेते ९०वर्षीय, स्वस्थ, खुशमिजाज, सभी परिजनों के दिलों की धड़कन, दादाजी, बिस्तर में पड़े हैं। अच्छे भले, हंसते खेलते, बातें करते, अचानक उन्हें स्ट्रोक आ गया, और वे कोमा में चले गए। पूरे घर में मातम मना हुआ है। दादाजी मज़ाक में कहते थे, पूरी सेंचुरी मारूंगा, इतनी जल्दी नहीं जाऊंगा।।
घर के सभी सदस्य चिंतित, प्रार्थनारत हैं, उन्हें अपने से अधिक दादाजी पर भरोसा है। उनके साथ ऐसा कुछ नहीं हो सकता। डॉक्टर ने भी बोला है, जब तक दादाजी कोमा में हैं, हम कुछ नहीं कर सकते। आप बस प्रार्थना करें। या तो सबकी प्रार्थना रंग लाती है, या दादाजी का आत्मविश्वास, अचानक उनके शरीर में हरकत होती है, एक बार नहीं, दो तीन बार ! सबके शरीर में आशा का संचार होता है, मानो जग जीत लिया हो। डॉक्टर भी कहते हैं, खुश खबर है। दादाजी अब पुनः स्वस्थ हो सकते हैं।।
सबसे प्यारी हरकत संगीत में होती है। शास्त्रीय गायन और कुछ नहीं, सरगम की हरकत ही तो है। जब रविशंकर सितार के साथ हरकत करते हैं, बिस्मिल्लाह खान की शहनाई जब हरकत करती है, भीमसेन जोशी, पंडित जसराज और कुमार गंधर्व जब तान छेड़ते हैं, तो इबादत हो जाती है। इबादत से बढ़कर कोई हरकत नहीं।
जगजीतसिंह जब सरकती जाए, रुख से नकाब …. गाते हैं, तो कहां कहां हरकत नहीं होती। दर्शक झूम उठते हैं। पूरा हॉल आहिस्ता आहिस्ता से गूंज जाता है। केवल जगजीत की आवाज़ ही नहीं, हर वाद्य यंत्र हरकत में आ जाता है। क्या तबला, क्या वॉयलिन और क्या संतूर।।
शरारत की गिनती भी हरकत में ही आती है। घर में बच्चों की शरारत न होती, तो क्या लॉक डाउन के पहाड़ जैसे दिन आसानी से कटते। हर हरकत ऐसी हो हमारी, जिससे कोई आहत न हो। थोड़े शिकवे भी हों, कुछ शिकायत भी हो। फिर भी अगर कोई बेजा हरकत हो गई हो, तो गुस्ताखी माफ, गुस्ताखी माफ़।।
© श्री प्रदीप शर्मा
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