श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “। गुड़ गोबर।।)

?अभी अभी # 739 ⇒ आलेख – । गुड़ गोबर। ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

गुड़ – गोबर में अगर गुड़ का गोबर होना है तो प्यार में परिश्रम के बावजूद शिकस्त ही हाथ लगना है। एक समय था, जब करे कराए पर पानी फिर जाता था, आजकल लोग सीधे फ्लश चला देते हैं। रायता फैलाने में तो हम आजकल बहुत आगे निकल गए हैं।

अगर अंगूर को सुखाकर किशमिश और सड़ाकर शराब बनाई जा सकती है, तो गुड़ बेचारे ने ऐसा क्या बिगाड़ा है कि उसकी नियति गोबर होना है।

गूंगे का गुड़ होगा बेचारा, क्या बोले। वैसे आयुर्वेद में पुराने गुड़ का बहुत महत्व बताया गया है, नीबू का अचार और असली घी जितना पुराना होता है, उतना फायदेमंद होता है, लेकिन स्वास्थ्य के मान से आजकल सभी खाद्य पदार्थों की एक्सपायरी डेट होने लग गई है। ऐसे में गुड़ को गोबर होने में ज्यादा वक्त नहीं लगता।।

अनुवाद की अपनी समस्या है। शब्दानुवाद के साथ साथ अगर भाषानुवाद ना हो, तो अर्थ का अनर्थ होने से कोई नहीं रोक सकता। भाषा भाव को पकड़ती है, शब्द अर्थ को। बिमल मित्र एक बंगाली लेखक हुए हैं, जिनके कई उपन्यासों का हिंदी में अनुवाद हुआ है। इतनी रोचक भाषा, किस्सागोही और घटनाओं का तारतम्य पाठकों को इतना बाँध लेता है, मानो लेखक स्वयं सामने मौजूद हो। बेगम मेरी बिस्वास, इकाई दहाई सैकड़ा, खरीदी कौड़ियों के मोल, और हां, साहब बीवी और गुलाम। इन सभी उपन्यासों का अनुवाद दिनेश आचार्य ने किया है, लेकिन वे बीच में कहीं नहीं हैं। बिमल मित्र ही आपके रूबरू हैं।

हमारे व्याकरण के मास्टर जी को अनुवाद का बड़ा शौक था। वे स्वयं wren के ग्रामर और Roget के थिसारस थे। उनके हाथ में कभी पुस्तक नहीं होती थी। साक्षात सरस्वती उनके मुख में विराजमान थी। बस बोल दिया, कल गुड़ गोबर का अंग्रेजी में अर्थ और एक वाक्य बनाकर लाना। बेचारे बच्चे डिक्शनरी में से jaggery और dung शब्द निकालते और वाक्य बनाते।

दूसरे दिन उनकी क्लास ली जाती। लो कर दिया न गुड़ गोबर !

Love’s Labour Lost अंग्रेजी नाटककार विलियम शेक्सपियर का एक सुखांत नाटक है। अंग्रेजी में सुख को कॉमेडी और दुख को ट्रेजेडी कहते हैं। उनकी एक और कॉमेडी का नाम है,

All is well that ends well.

वे यहीं नहीं रुकते। अपने सुखांत नाटकों का अंत भी As you like it नामक play से करते हैं। हमारा नाटक उनके लिए खेल तमाशा ही तो है।।

शेक्सपियर की पूरी कॉमेडी का सीधा प्रसारण तो नहीं हो सकता, लेकिन पर्दे के पीछे उसका आनंद अवश्य लिया जा सकता है। इसके लिए शेक्सपियर को पढ़ना जरूरी नहीं, बस अपने टॉयलेट के कमोड को ही उनकी कॉमेडी मान लेना है। क्योंकि वहां तो वैसे भी सब गुड़ गोबर ही होना है।

रात को बड़े प्यार से छप्पन में विजय चाट का पेटिस और खमण, और बाद में मधुरम स्वीट्स की रसमलाई ! और तो और मोनिका गैलेक्सी की आइसक्रीम भी कोई काम नहीं आई। सुबह सब खाया पीया निकल गया। हुआ न Love’s Labour Lost. चलो इतने दिनों की कब्जियत से छुटकारा तो मिला। शेक्सपीयर ने गलत नहीं कहा, All is well that ends well. अच्छा ही हुआ, करे कराए पर फ्लश जो फिर गया। As you like it. अब आपको जैसा भी लगे।।

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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