श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का हिन्दी बाल -साहित्य एवं हिन्दी साहित्य की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचना सहित 145 बालकहानियाँ 8 भाषाओं में 1160 अंकों में प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तकेँ-1- रोचक विज्ञान कथाएँ, 2-संयम की जीत, 3- कुएं को बुखार, 4- कसक, 5- हाइकु संयुक्ता, 6- चाबी वाला भूत, 7- बच्चों! सुनो कहानी, इन्द्रधनुष (बालकहानी माला-7) सहित 4 मराठी पुस्तकें प्रकाशित। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी का श्री हरिकृष्ण देवसरे बाल साहित्य पुरस्कार-2018 ₹51000 सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित व पुरस्कृत। साप्ताहिक स्तम्भ “श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य” के अंतर्गत साहित्य आप प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकते हैं। आज प्रस्तुत है लेखिका : डॉ. रामेश्वरी ‘नादान’ जी द्वारा लिखित बाल साहित्य: – “कल, आज और कल” की समीक्षा।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य # २१५ ☆
☆ बाल साहित्य: कल, आज और कल – लेखिका: डॉ. रामेश्वरी ‘नादान’ ☆ समीक्षा – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’’ ☆
पुस्तक समीक्षा: बाल साहित्य: कल, आज और कल
लेखक: डॉ. रामेश्वरी ‘नादान‘
प्रकाशक: रावत डिजिटल (बुक पब्लिशिंग हाउस), गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
ISBN: 978-81-990525-1-2
प्रथम संस्करण: 2025
मूल्य: ₹150.00
पृष्ठ संख्या: 66
समीक्षक: ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश‘
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डॉ. रामेश्वरी ‘नादान’ की पुस्तक बाल साहित्य: कल, आज और कल बाल साहित्य के क्षेत्र में एक संक्षिप्त किंतु गहन शोध कार्य है। 66 पृष्ठों की यह पुस्तक बाल साहित्य के इतिहास, वर्तमान और भविष्य को समेटती है और इसका आकर्षक, सुंदर व नयनाभिराम कवर पाठकों को तुरंत अपनी ओर खींचता है। यह पुस्तक शिक्षकों, लेखकों, शोधकर्ताओं और बाल साहित्य प्रेमियों के लिए एक उपयोगी संसाधन है।
कथानक और संरचना- पुस्तक का अनुक्रम व्यवस्थित और व्यापक है, जो बाल साहित्य की उत्पत्ति, संरचना, विधाओं और डिजिटल युग में इसके विकास को रेखांकित करता है। लेखिका ने प्रमुख लेखकों और उनके योगदान को शामिल किया है, साथ ही अपनी साहित्यिक यात्रा को भी साझा किया है, जो इसे व्यक्तिगत और प्रेरणादायक बनाता है। पुस्तक में कॉमिक्स, विज्ञान कथाओं और डिजिटल माध्यमों जैसे आधुनिक आयामों पर भी ध्यान दिया गया है।
इस पुस्तक में प्रमुख बाल साहित्यकारों का उल्लेख किया गया हैं। आबिद सुरती: भारतीय कॉमिक्स के क्षेत्र में अग्रणी, जिन्होंने ‘बाहादुर’ जैसे किरदारों से बच्चों को रोमांचक कहानियाँ दीं। अनंत पई: ‘अमर चित्र कथा’ के संस्थापक, जिन्होंने भारतीय संस्कृति और इतिहास को बच्चों तक पहुँचाया। परशुराम शर्मा: बाल साहित्य में हास्य और मनोरंजन के लिए जाने जाते हैं, उनके कार्य बच्चों को आकर्षित करते हैं। शंकर सुल्तानपुरी: वरिष्ठ साहित्यकार, जिनकी रचनाएँ बच्चों में नैतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करती हैं। देवेंद्र मेवाड़ी: विज्ञान कथाओं के माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने वाले लेखक। प्रकाश मनु: कविता और कहानियों के जरिए बच्चों के लिए प्रेरणादायक साहित्य रचने वाले साहित्यकार। डॉ. घमंडीलाल अग्रवाल: बाल साहित्य में गहन और विचारोत्तेजक रचनाओं के लिए प्रसिद्ध। दीनदयाल शर्मा: बच्चों के लिए सरल और शिक्षाप्रद कहानियाँ लिखने वाले साहित्यकार। ओमप्रकाश क्षत्रिय: बाल साहित्य में योगदान देने वाले लेखक, जिनकी रचनाएँ प्रेरणादायक और रोचक हैं। शकुंतला कालरा: महिला साहित्यकार, जिन्होंने बच्चों के लिए संवेदनशील और भावनात्मक कहानियाँ लिखीं। बसंती पंवार: बच्चों के लिए प्रेरक और नैतिक कहानियों की रचनाकार, जिनके कार्य सराहनीय हैं। क्षमा शर्मा: बाल साहित्य में महिलाओं की भूमिका को सशक्त करने वाली लेखिका। नीलम राकेश: बच्चों के लिए कविताओं और कहानियों के माध्यम से सृजनात्मकता को बढ़ावा देती हैं। कमलेश चंद्राकर: समकालीन बाल साहित्य में सक्रिय, जिनकी रचनाएँ बच्चों को आकर्षित करती हैं। मुकेश नौटियाल: बच्चों के लिए रोचक और मनोरंजक कहानियाँ लिखने वाले चर्चित लेखक। मनोहर चमोली ‘मनु’: वर्तमान बाल साहित्य में अग्रणी, जिनके कार्य बच्चों में रचनात्मकता जगाते हैं। अर्चना त्यागी: समकालीन लेखिका, जिनकी रचनाएँ बच्चों के लिए प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं।
विश्लेषण और मूल्यांकन- डॉ. रामेश्वरी ‘नादान’ ने इस पुस्तक में बाल साहित्य के ऐतिहासिक और आधुनिक दोनों पहलुओं को संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया है। लेखन शैली सरल, स्पष्ट और शोधपरक है, जो इसे सामान्य पाठकों और विशेषज्ञों दोनों के लिए उपयोगी बनाती है। पुस्तक का सबसे मजबूत पक्ष इसका व्यापक दृष्टिकोण है, जो आबिद सुरती और अनंत पई जैसे कॉमिक्स लेखकों से लेकर प्रकाश मनु और शकुंतला कालरा जैसे वरिष्ठ साहित्यकारों तक को समेटता है।
विज्ञान कथाओं में देवेंद्र मेवाड़ी और डिजिटल युग में बाल साहित्य के महत्व पर लेखिका का विश्लेषण समकालीन संदर्भों को रेखांकित करता है। हालाँकि, 66 पृष्ठों की संक्षिप्तता के कारण कुछ विषयों, जैसे कमलेश चंद्राकर और अर्चना त्यागी जैसे लेखकों के कार्यों का विस्तृत विश्लेषण, और गहराई माँगता है। कुछ और उदाहरण या केस स्टडीज से पुस्तक और प्रभावी हो सकती थी। फिर भी, यह अपने उद्देश्य में सफल है।
पुस्तक का कथानक और संदेश- पुस्तक का केंद्रीय संदेश है कि बाल साहित्य बच्चों की कल्पनाशीलता, नैतिकता और रचनात्मकता को आकार देने में महत्वपूर्ण है। शंकर सुल्तानपुरी और बसंती पंवार जैसे लेखकों के नैतिक मूल्यों पर आधारित कार्यों से लेकर मनोहर चमोली ‘मनु’ और मुकेश नौटियाल जैसे समकालीन लेखकों की रचनाओं तक, यह पुस्तक बच्चों के लिए साहित्य की प्रासंगिकता को दर्शाती है। डिजिटल युग में बच्चों के लिए साहित्य को सुलभ और रोचक बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
निष्कर्ष और सिफारिश– बाल साहित्य: कल, आज और कल एक विचारोत्तेजक और जानकारीपूर्ण पुस्तक है, जो बाल साहित्य के प्रति उत्साही पाठकों, शिक्षकों, लेखकों और शोधकर्ताओं के लिए उपयुक्त है। यह आबिद सुरती, अनंत पई, शकुंतला कालरा, और अर्चना त्यागी जैसे लेखकों के योगदान को उजागर करती है। मैं इसे 4.5/5 की रेटिंग देता हूँ। इसकी संक्षिप्तता और व्यापक कवरेज इसे मूल्यवान बनाती है। यह पुस्तक विशेष रूप से उन लोगों के लिए अनुशंसित है जो बाल साहित्य के विकास और इसके भविष्य में रुचि रखते हैं।
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© श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
03/07/2025
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