श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # ३७१ ☆
व्यंग्य – बीत गया हैप्पी हिंदी डे
श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆
आज हिंदी दिवस है और हम सभी अपनी मातृभाषा हिंदी दिवस का जन्मदिन मना रहे हैं।
यूं हिंदी और अंग्रेजी तिथियों में हम सबका जन्म दिन दो बार मनाया ही जाता है, उसी तरह हिंदी दिवस भी प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर 14 सितंबर को एवं 10 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है।
तो “हैप्पी बर्थडे” हिंदी ।
क्योंकि हिंदी को अंग्रेजी का सहारा लेने में कोई शर्म नहीं करनी चाहिए , यही आधुनिकता है ।
प्यारी हिंदी आज कितनी खुश होगी! आखिरकार साल दर साल इसी बहाने हम हिंदी को याद तो करते हैं। सरकारी खजाने से बड़ा बजट एलाट होता है, सेमिनार होते हैं की हिंदी का उपयोग कैसे बढ़ाएं। पोस्टर,बैनर बनते हैं हिंदी फॉर्म बुकलेट, छपते बंटते हैं।
आज का दिन , हिंदी का होता है । सबके व्हाट्सएप स्टेटस हिंदी में होंगे, फेसबुक पोस्ट हिंदी में होंगे भले ही रोमन हिंदी में लिखें । कल से फिर भले ही वापस अंग्रेजी में काम जारी हो जाए, लेकिन आज तो हिंदी की जय-जयकार है!
हमने हिंदी को स्मार्ट बना लिया है। एफ एम रेडियो पर अंग्रेजी मिक्सड हिंदी का नया प्रयोग सुनने मिलता है। हम कहते हैं “मैं अपने ऑफिस से घर जा रहा हूं।” वाह! कितना अच्छा लगता है। “कार्यालय से घर” कहने में जिव्हा ट्विस्ट होती है!
अब हम मॉडर्न हैं, अप-टू-डेट हैं। हमारी हिंदी में भी इंग्लिश का तड़का लगा रहता है।
देश में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन व्यावहारिक रूप से अंग्रेजी ही सबकी प्रिय है। स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाती है, लेकिन अच्छे स्कूल वे माने जाते हैं जहां सब कुछ अंग्रेजी में होता है। हिंदी मीडियम के बच्चे तो जैसे दूसरे दर्जे के नागरिक हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था में हिंदी एक विषय है, बाकी सब विषय का मध्यम अंग्रेजी ही है।
नेता जी भी कितने समझदार हैं! हिंदी दिवस पर दो-चार वाक्य हिंदी में बोल देते हैं, बाकी सारे साल इंटरनेशनल इमेज बनाने के लिए अंग्रेजी में भाषण देते हैं, भले ही गलत स्पेलिंग में या हिंदी में लिखे अंग्रेजी शब्द पढ़ कर बोलते हों।
बॉलीवुड की तो बात ही न्यारी है। पहले फिल्में होती थीं “मुगल-ए-आजम”, “शोले”, “दीवार”। अब आती हैं “हाउसफुल”, “रेडी”, “वांटेड”। गाने भी कमाल के हैं – “यू आर माई सोनिया”, “नागिन डांस”। हमारे फिल्मकार कहते हैं कि अंग्रेजी नाम रखने से फिल्म इंटरनेशनल लगती है। जी हां, “प्रेम कहानी” कहने से तो बहुत लोकल लगता है!
व्यापारियों का भी अपना फलसफा है। दुकान पर लिखा रहता है “सेल”, “ऑफर”, “डिस्काउंट”। “बिक्री”, “छूट” जैसे शब्द पुराने जमाने की बात हो गई। ग्राहक भी खुश होते हैं , लगता है कि विदेशी माल मिल रहा है। “स्वदेशी” शब्द सुनकर तो लोग डर जाते हैं कि कहीं कुछ घटिया न हो।
मीडिया भी दो कदम बढ़कर है। न्यूज चैनल पर “ब्रेकिंग न्यूज”, “एक्सक्लूसिव रिपोर्ट”, “लाइव अपडेट” चलता रहता है। हिंदी में कहना हो तो “ताजा समाचार”, “विशेष रिपोर्ट”, “सीधा प्रसारण” कहते हैं, लेकिन यह सब पुराने जमाने की बात है। आजकल की पत्रकारिता में अंग्रेजी का तड़का जरूरी है, वरना टी आर पी रेटिंग कैसे आएगी? मजेदार बात यह है कि हम अपनी डिग्रियों पर भी अंग्रेजी में नाम लिखवाते हैं। “राम कुमार शर्मा” की जगह “Ram Kumar Sharma” लिखवाना जरूरी है। जॉब इंटरव्यू में हिंदी नाम बताने में शर्म आती है, लगता है कि इंटरव्यूअर सोचेगा कि यह तो निरा गंवार है।
रेस्टोरेंट में मेनू कार्ड अंग्रेजी में होता है। “दाल, चावल” की जगह “फ्राइड दाल” ” राइस”, “रोटी” की जगह “इंडियन ब्रेड ” लिखा रहता है। वेटर से हिंदी में बात करने में हिचकिचाहट होती है, लगता है कि हम कुछ छोटे लोग हैं।
मजेदार यह है कि हमारे घरों में दादी-नानी से हिंदी में बात करते हैं, बच्चों से अंग्रेजी में। बुजुर्गों के लिए हिंदी, बच्चों के लिए अंग्रेजी यह हमारी भाषाई नीति बन गई है। बच्चे हिंदी बोलें तो मां बाप परेशान हो जाते हैं कि कहीं ये बच्चा जमाने से पिछड़ न जाए।
सोशल मीडिया पर भी कमाल का दृश्य है। फेसबुक पर स्टेटस लिखते हैं “गुड मॉर्निंग फ्रेंड्स, हैव अ नाइस डे”। व्हाट्सएप पर “गुड नाइट स्वीट ड्रीम्स”। दो भाषाओं का ऐसा घालमेल कि समझ में ही नहीं आता कि हम कौन सी भाषा बोल रहे हैं।
अस्पतालों में भी यही हाल है। डॉक्टर साहब अंग्रेजी में बीमारी बताते हैं, हिंदी में समझाना पड़ता है। दवाइयों के नाम भी अंग्रेजी में ही लिखे रहते हैं। मरीज को समझ में नहीं आता, लेकिन अंग्रेजी में लिखा है तो दवाई बेहतर लगती है।
अजीब बात यह है कि हम अपने बच्चों के नाम भी अंग्रेजी वर्शन में रखते हैं। “आर्यन”, “रिया”, “ट्विंकल” जैसे नाम फैशन में हैं। “रामकुमार”, “श्यामसुंदर” जैसे नाम आउट ऑफ डेट हो गए हैं।
लेकिन फिर भी आज का दिन हिंदी का है! आज हमें गर्व से कहना चाहिए कि हम भारतीय हैं और हिंदी हमारी भाषा है। भले ही कल से फिर अंग्रेजी शुरू हो जाए, आज तो हिंदी की जय-जयकार है। तो आइए मिलकर कहते हैं “हैप्पी बर्थडे हिंदी!” अरे क्षमा करें, “हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!”
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© श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
म प्र साहित्य अकादमी से सम्मानित वरिष्ठ व्यंग्यकार
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






