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हिन्दी साहित्य- आलेख – * आत्मनिर्भरता के लिए सेल्फी * – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव “विनम्र”

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव "विनम्र" आत्मनिर्भरता के लिए सेल्फी (प्रख्यात साहित्यकार श्री विवेक  रंजन  श्रीवास्तव जी  'सेल्फी 'को  किस दृष्टि से देखते हैं, जरा आप भी देखिये।)   "स्वाबलंब की एक झलक पर न्यौछावर कुबेर का कोष " राष्ट्र कवि मैथली शरण गुप्त की ये पंक्तियां सेल्फी फोटो कला के लिये प्रेरणा हैं. ये और बात है कि कुछ दिल जले  कहते हैं कि सेल्फी आत्म मुग्धता को प्रतिबिंबित करती हैं. ऐसे लोग यह भी कहते हैं कि सेल्फी मनुष्य के वर्तमान व्यस्त एकाकीपन को दर्शाती है. जिन्हें सेल्फी लेनी नही आती ऐसी प्रौढ़ पीढ़ी सेल्फी को आत्म प्रवंचना का प्रतीक बताकर अंगूर खट्टे हैं वाली कहानी को ही चरितार्थ करते दीखते हैं. अपने एलबम को पलटता हूं तो नंगधुड़ंग नन्हें बचपन की उन श्वेत श्याम  फोटो पर दृष्टि पड़ती हैं जिन्हें मेरी माँ या पिताजी ने आगफा कैमरे की सेल्युलर रील घुमा घुमा कर खींचा रहा होगा. अपनी यादो में खिंचवाई गई पहली तस्वीर में मैं गोल मटोल सा हूँ, और शहर के स्टूडियो के मालिक और प्रोफेशनल फोटोग्राफर कम शूट डायरेक्टर लड़के ने घर पर आकर, चादर का बैकग्राउंड बनवाकर...
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हिन्दी साहित्य – आलेख – * पैसा कमाने के चक्कर में निजी अस्पतालों ने दिया सिजेरियन डिलीवरी को बढ़ावा * – सुश्री ऋतु गुप्ता

सुश्री ऋतु गुप्ता पैसा कमाने के चक्कर में निजी अस्पतालों ने दिया सिजेरियन डिलीवरी को बढ़ावा (सुश्री ऋतु गुप्ता जी  का एक सार्थक, सामयिक  एवं सटीक लेख। सुश्री ऋतु जी ने एक अत्यंत ज्वलंत  समस्या  पर अपने विचार रखे हैं । इस विषय  पर  हमारे साथ ही चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों को मानवीय दृष्टिकोण से विचार करने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त मैं यह भी कहना चाहूँगा कि अभी भी  कुछ सम्माननीय चिकित्सक हैं, जो बिना हिम्मत हारे अथक प्रयास करते  हैं ताकि सर्जरी की आवश्यकता न पड़े। हम उनका सादर सम्मान करते हैं।)  जब मैनें 20 जनवरी रविवारीय दैनिक ट्रिब्यून में एक न्यूज का हैडलाइन पढ़ा कि मोटी कमाई के लिए सिजेरियन डिलीवरी को बढ़ावा दे रहे हैं निजी अस्पताल, मेरे अपने साथ बीती एक-एक घटना मेरी आँखों के सामने तैर गई।आज क्या आज से दस साल पहले भी तो यही तो होता था। तब भी तो सिजेरियन डिलीवरी के नये -नये बहाने खोज लिए जाते थे और बेचारे घरवाले डॉक्टर्स के सामने कुछ...
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हिन्दी साहित्य – आलेख – “मकर संक्रांति पर्व” – डॉ उमेश चंद्र शुक्ल

डॉ उमेश चन्द्र शुक्ल   मकर संक्रांति पर्व (मकर संक्रांति पर्व पर  डॉ उमेश चंद्र शुक्ल जी का  विशेष  आलेख  उनके व्हाट्सएप्प  से साभार। ) *मकरसंक्रांति कि आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएँ ।* मकर संक्रांति त्यौहार, हिंदुओं के देव सूर्य को समर्पित है। जब सूर्य धनु से मकर राशि या दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर स्थानांतरित होता है अधिकांश हिंदू त्यौहार चंद्रमा की स्थिति के अनुसार मनाये जाता हैं, लेकिन यह त्यौहार सूर्य के चारों तरफ प्रथ्वी के चक्र की स्थति के अनुसार मनाया जाता है। इसलिए हिंदू पंचांग के अनुसार कोई तय तिथि घोषित नहीं की जा सकती है। आज 15 जनवरी से एक माह तक सूर्य मकर में रहेंगे। गुरु वृश्चिक राशि में ही हैं। शनि धनु में गोचर कर रहे हैं। राहु कर्क में तथा केतु मकर में हैं। सूर्य तथा शनि एक साथ एक माह मकर राशि में रहेंगे। इस प्रकार सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में एक माह तक विराजमान रहेंगे। मकर संक्रांति के बाद कड़ाके की सर्दी का दौर खत्म...
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हिन्दी साहित्य – आलेख – “विश्व पुस्तक मेला 2019” – सुश्री मालती मिश्रा ‘मयंती’

सुश्री मालती मिश्रा   विश्व पुस्तक मेला 2019 (प्रस्तुत है e-abhivyakti के अनुरोध पर सुश्री मालती मिश्रा जी द्वारा प्रेषित  विश्व पुस्तक मेला 2019 पर  विशेष रिपोर्ताज। इस आलेख के लिए सुश्री मालती जी का विशेष आभार।) प्रगति मैदान नई दिल्ली में प्रत्येक वर्ष विश्व पुस्तक मेला का वृहद् आयोजन किया जाता है, यह मेला राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एन.बी.टी.) अर्थात् नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। पिछले 41 वर्षों से इस मेले का आयोजन होता आ रहा है। इस वर्ष (2019) भी नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा भारतीय व्यापार संव‌र्द्धन परिषद (आइटीपीओ) के सहयोग से इसका आयोजन किया गया। इस वर्ष मेले की थीम है- 'दिव्यांग जनों की पठन आवश्यकताएं।' हॉल नं० 7 ई में थीम मंडप का निर्माण किया गया है। थीम को ध्यान में रखते हुए मेले के इस संस्करण का ध्यान ऑडियो, स्पर्शनीय, मूक और ब्रेल किताबों की प्रदर्शनियों के जरिए समावेशी ज्ञान के विचार को बढ़ावा देने के लिए ‘रीडर्स विद स्पेशल नीड्स’ पर है। जो कि बेहद आकर्षक है तथा चिल्ड्रेन बुक...
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हिन्दी साहित्य – आलेख (शोध) – नूतन गुप्ता की कविताओं में एकाकीपन और अवसाद – शोधार्थी: सौरभ चढ़ार

नूतन गुप्ता  नूतन गुप्ता की कविताओं में एकाकीपन और अवसाद शोधार्थी: सौरभ चढ़ार कविता स्वानिपूतिं को अभिव्यक्त करने का सर्वाधिक सशक्त माध्यम है।  कवि अपने भावों, विचारों और अनुभूतियाँ को शब्दों में ढालकर कविता के रूप मैं अभिव्यक्त करता है।  कवि की इसी अभिव्यक्ति के पठन-पाठन अथवा श्रवण से पाठक अथवा श्रोता रसास्वादन करता है।  कविता में रसास्वादन का अर्थ है आनंद की प्राप्ति। पाठक अथवा श्रोता अपनी लौकिक अनुभूतियों को भूलकर एक अमूर्त आनंद देता साथ एकाकार हो जाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार - "कुछ रूप रंग की वस्तुएँ ऐसी होती हैं, जो हमारे मन में आते ही थोड़ी देर के लिए हमारी सत्ता पर ऐसा  अधिकार कर लेती है कि उसका ज्ञान ही हवा हो जाता है और हम उन वस्तुओं की भावना के रूप में ही परिणत हो जाते हैं"।1  पाठक या श्रोता विभिन्न अलग-अलग मनोदशाओं के अनुसार अलग-अलग रस की कविताओं का आनंद ले सकता है।  कवि भी अलग-अलग समय पर अलग-अलग मनोदशाओं में होता है और अलग-अलग रसों को...
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हिन्दी साहित्य – आलेख – “संस्कारधानी जबलपुर अंतर्राष्ट्रीय कला एवं साहित्य महोत्सव – एक परिकल्पना” – हेमन्त बावनकर

 हेमन्त बावनकर संस्कारधानी जबलपुर अंतर्राष्ट्रीय कला एवं साहित्य महोत्सव – एक परिकल्पना सम्पूर्ण भारतवर्ष के विभिन्न शहरों में निर्धारित तिथियों में अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सवों का आयोजन होता है, जिन्हें “लिटेररी फेस्टिवल (लिटफेस्ट)” के नाम से जाना जाता है। इनमें से कुछ प्रसिद्ध लिटफेस्ट हैं - जयपुर लिटेररी फेस्टिवल, चंडीगढ़ लिटेररी फेस्टिवल, कोलकाता लिटेररी, पुणे लिटेररी फेस्टिवल, बेंगलुरु लिटेररी फेस्टिवल आदि। इनमें से कुछ राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए जाते हैं और कुछ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए जाते हैं। इन साहित्यिक एवं कला महोत्सवों में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार अपने अनुभव एवं विचार साझा करते हैं और साथ ही देश भर से आए साहित्यकारों को उन वरिष्ठ साहित्यकारों से रूबरू होने का अवसर भी मिलता है। इसके अतिरिक्त स्थानीय भाषा के साहित्य, रंगमंच एवं कला पर भी विचार-विमर्श, प्रस्तुतियां, पुस्तक प्रदर्शनी एवं अन्य स्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन होता है। ऐसे कार्यक्रमों से कोई भी अनभिज्ञ नहीं हैं। विगत दिनों मुझे ‘पाथेय कला एवं साहित्य अकादमी ’ के एक साहित्यिक आयोजन में भाग लेने...
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हिन्दी साहित्य – आलेख – आज की पत्रकारिता – डॉ विजय तिवारी ‘किसलय’

डॉ विजय तिवारी ‘किसलय’ आज की पत्रकारिता (दिनांक 23 दिसंबर 2018 को कच्छी  जैन भवन जबलपुर में पत्रकार विकास मंच के तटवाधान में आयोजित पत्रकारिता पर डॉ विजय तिवारी ‘किसलय’ जी का व्याख्यान) निज कबित्त केहि लाग न नीका सरस होउ अथवा अति फीका अपना काम, अपना नाम, अपना व्यवसाय किसे अच्छा नहीं लगता। वकील अपने व्यवसाय और अपनी जीत के लिए कितनी झूठी-सच्ची दलीलें देते हैं, हम सभी जानते हैं। डॉक्टर और दूकानदार अपने लाभ के लिए क्या झूठ नहीं बोलते? तब पत्रकार बंधु कोई अलग दुनिया के तो हैं नहीं। इन्हें भी लाभ की आकांक्षा है, सारी दुनिया में लोग रोजी-रोटी से आगे भी कुछ चाहते हैं। बस यही वह चाह है जो हमें ईमानदारी के मार्ग पर चलने से रोकती है। आज मैं कुछ ऐसी बातों का उल्लेख करना चाहता हूँ, जो कुछ पत्रकार बंधुओं  को अच्छी नहीं लगेंगी। दूसरी ओर ये वो बातें हैं जो समाज में  पत्रकारों के लिए आये दिन कही भी जाती हैं। मेरा सभी बंधुओं से निवेदन है कि वे इन...
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हिन्दी साहित्य – आलेख – आम हिन्दी पाठकों को हिंग्लिश परोसते कुछ अखबार – डॉ विजय तिवारी ‘किसलय’

डॉ विजय तिवारी 'किसलय' आम हिन्दी पाठकों को हिंग्लिश परोसते कुछ अखबार (आजकल हिन्दी के समाचार पत्रों में हिंगलिश के उपयोग पर डॉ विजय तिवारी 'किसलय' जी का तथ्यात्मक एवं विचारणीय आलेख) भूमंडलीकरण या सार्वभौमिकता की बात कोई नई नहीं है। हमारे प्राचीन ग्रंथ 'वसुधैव कुटुंबकम्" की बात लिख कर इसकी आवश्यकता पहले ही प्रतिपादित कर चुके हैं, लेकिन इसका आशय यह कदापि नहीं है कि आवश्यकता न होते हुए भी हम अपनी संस्कृति ,रीति-रिवाज, परंपराओं, धर्म एवं भाषा तक को दरकिनार कर दूसरों की गोद में बैठ जाएँ। बेहतर तो यह है कि हम स्वयं को ही इतना सक्षम बनाने का प्रयास करें कि हमें छोटी-छोटी बातों के लिए दूसरों का मुँह न ताकना पड़े। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि हम केवल और केवल नकलची बनकर नकल न उतारते फिरें।  परिस्थितियों एवं परिवेश की आवश्यकतानुरूप स्वयं को ढालना अच्छी बात है, परंतु बिना सोचे-समझे अंधानुकरण को बेवकूफी भी कहा जाता है। एक छोटा सा उदाहरण है 'नेक टाई' का। इसे...
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हिन्दी साहित्य – आलेख – आत्मनिर्भरता ही आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी – सुश्री ऋतु गुप्ता

सुश्री ऋतु गुप्ता   आत्मनिर्भरता ही आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी (सुश्री ऋतु गुप्ता जी के लेख ,कहानी व कविताएँ विभिन्न समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं।दैनिक ट्रिब्यून में जनसंसद में आपको लेख लिखने के लिए कई बार प्रथम पुरस्कार मिला है। आपका एक काव्य संग्रह 'आईना' प्रकाशित हो चुका है। दो किताबें प्रकाशन के लिए तैयार हैं। प्रस्तुत है सुश्री ऋतु जी का यह प्रेरणास्पद लेख।) मैनें अपनी जिंदगी से चाहे कुछ सीखा हो या न पर एक बात जरूर सीखी है कि- अगर आत्मविश्वास प्रबल है तो जीत निश्चित है।आत्मविश्वास का अर्थ यही है कि अपने ऊपर विश्वास या फिर यह भी कह सकते हैं कि अपने द्वारा किये जाने वाले कार्यों पर पूर्ण विश्वास। इंसान को जब तक यह लगता है कि वह हर कार्य करने में सक्षम व समर्थ है तब उसका अपने ऊपर विश्वास बना रहता है और यह जीवनरूपी गाड़ी सरपट दौड़ती रहती है,जैसे ही अपने ऊपर से भरोसा डगमगाता है तो उसकी स्थिति पंक्चर टायर वाली गाड़ी...
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हिन्दी साहित्य – आलेख – “भय” कानून का – डॉ विदुषी शर्मा

डॉ विदुषी शर्मा  आलेख - "भय" कानून का। आज बात करते हैं भय की, कानून के भय की। आज अखबार के मुख्य पृष्ठ पर ही यह खबर थी कि एक शख्स ने दूसरे शख्स को केवल गाड़ी ठीक से चलाने की नसीहत दी तो उन्होंने उसे गोली मार दी। उस इंसान की मदद को कोई नहीं आया ।परिणाम , उसकी मौत मौत हो गई। (विनोद मेहरा , 48 वर्ष जी टी करनाल रोड भलस्वा फ्लाईओवर) घर से जब किसी की असामयिक मृत्यु हो जाती है  तो उस परिवार पर क्या बीतती है, यह सब शब्दों में बयान कर पाना मुश्किल है क्योंकि यह ऐसा दर्द है जो उसके परिवार को, उस शख्स से जुड़े हर इंसान को जिंदगी भर झेलना पड़ता है। कई लोग यहां सोचेंगे कि यह खबर तो पुरानी है। तो हफ्ते, 10 दिन में किसी की जिंदगी नहीं बदलती ।जिस घर से एक इंसान की मौत हुई है 10 दिन में उनका कुछ भी नहीं बदलता और जिंदगी की...
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