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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)
☆ साहित्य संगम संस्थान ने सक्रिय भावी कर्णधारों को किया सम्मानित ☆ साभार – सुश्री छाया सक्सेना ‘प्रभु’ ☆
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नई दिल्ली, 10 फरवरी 2026 (मंगलवार)। साहित्य संगम संस्थान, दिल्ली द्वारा संगम के सक्रिय भावी कर्णधारों को प्रोत्साहित करने हेतु एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान की कोषाध्यक्ष छाया सक्सेना प्रभु ने चयनित प्रतिभाओं को नगद पुरस्कार प्रदान किए। नवीन कुमार भट्ट ‘नीर’ को 1001 रुपये तथा अनामिका वैश्य ‘आईना’, सुमित कुमार, महेंद्र सिंह, अश्वनी वर्मा, अंकुश सोनकर, वंश कुमार गौतम, रितिका रावत, मुस्कान गौतम, गौरव कुमार, राजपूत, शिवापाल, श्रेयांश, पीयूष, अविनाश एवं रंजीत को 501-501 रुपये की सम्मान राशि सीधे उनके खातों में प्रेषित की गई।
संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह मंत्र ने कहा कि ये सभी भावी कर्णधार लंबे समय से निःस्वार्थ भाव से संस्थान की पत्र-पत्रिकाओं, सम्मान पत्रों एवं विभिन्न डिजाइनों के माध्यम से हिंदी और हिंदी साहित्य के संवर्धन में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान वर्ष 2016 से “सबका प्रयास, सबका विकास, सबका विश्वास” के मूल मंत्र के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर है।
कोषाध्यक्ष छाया सक्सेना प्रभु ने सम्मानित प्रतिभाओं पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि संगम की पत्र-पत्रिकाएं और सम्मान पत्र अपने विशिष्ट अलंकरण के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी प्रतिभाएं भविष्य में भी साहित्य और अलंकरण के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देती रहेंगी।
संस्थान की छंदशाला के आचार्य डॉ. मधुव्रत ने कहा कि यह सम्मान न केवल प्रतिभाओं को गौरवान्वित करेगा, बल्कि उनके आगामी साहित्यिक पथ को भी सुदृढ़ बनाएगा। इससे संगम की पत्र-पत्रिकाओं और सम्मान पत्रों की गरिमा में वृद्धि होगी।
सम्मान प्राप्त करने पर नवीन कुमार भट्ट ‘नीर’ ने कहा कि साहित्य से जुड़ा प्रत्येक सम्मान उनके लिए अनमोल है। उन्होंने कहा कि पत्र-पत्रिकाओं एवं सम्मान पत्रों को बेहतर और आकर्षक स्वरूप देना ही पारदर्शिता का प्रतीक है, ताकि लोग उन्हें सहेजकर गर्व से प्रदर्शित कर सकें। उन्होंने संस्थान की इस पहल की सराहना करते हुए सभी सम्मानित प्रतिभाओं को बधाई दी।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के सभी पदाधिकारियों ने सम्मानित प्रतिभाओं को शुभकामनाएँ दीं तथा सभी सम्मानित प्रतिभाओं ने संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार में निरंतर सहयोग का संकल्प दोहराया।
जय हिंद, जय हिंदी।
प्रस्तुति – सुश्री छाया सक्सेना ‘प्रभु’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈







