श्री मदन शर्मा 

🌱 देहरादून के वरिष्ठ साहित्यकार श्री मदन शर्मा जी के 90 गौरवशाली वर्ष पूर्ण – हार्दिक अभिनन्दन! 🌷

देहरादून के वरिष्ठ साहित्यकार श्री मदन शर्मा जी ने 05 जुलाई 2026 को अपनी आयु के नब्बे वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। उनका जन्म 05 जुलाई 1936 को पूर्वी पंजाब की छोटी सी रियासत मालेर कोटला में हुआ था। उनके अनुसार, “यह तारीख सही है या गलत, कोई गारंटी नहीं। किंतु यह बात पक्की है, जिस दिन मैं पैदा हुआ, शहर में हड़ताल हो गई थी।”

हड़तालियों को उनके जन्म लेने या न लेने से कोई सरोकार नहीं था। यह मात्र संयोग था कि उस दिन शहर के एक बड़े नेता का सरे बाज़ार कत्ल हो गया था और आनन फानन सभी दुकानें बंद हो गई थीं। तब देश में अंग्रेज़ी शासन था। मालेर कोटला 119 गांवों वाली छोटी सी रियासत थी जहाँ के नवाब जनाब अहमद अली खान थे।

नवाब के वंश को सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी का वरदान प्राप्त था जिसके फलस्वरूप रियासत में कभी हिन्दू- मुस्लिम दंगे नहीं हुए थे, यहां तक कि 1947 में जब पूरा उत्तर भारत सांप्रदायिकता की आग में जल रहा था, यहां पर धार्मिक एकता की फौलादी दीवार में ज़रा भी जुंबिश तक नहीं आई थी।

श्री जगत सिंह बिष्ट

(Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.)

मदन शर्मा जी के पिताजी इन्हीं नवाब की सरकार में एक अहलकार थे। कालांतर में, उनका स्वास्थ्य बिगड़ा तो नौकरी चली गई। उसके बाद तो मानो परिवार पर दुखों का पर्वत टूट पड़ा। किशोरावस्था में मदन जी, पहले लुधियाना, फिर अपने जीजाजी के पास देहरादून पहुंचे। भाग्य ने उन्हें, 01 अगस्त 1951 को, ऑर्डनेंस फैक्टरी पहुंचाया, जहां वर्षों तक कार्य करने के उपरांत, वे जुलाई 1994 में सेवानिवृत्त हुए।

उन्हीं के शब्दों में, “मैंने अब तक जितना लिखा है, वह सब प्रकाशित नहीं हो सका। उसमें से केवल आठ उपन्यास छपे हैं और लगभग पांच सौ छोटी-बड़ी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं जिनमें कहानियां, व्यंग्य, लेख, लघुकथाएं, संस्मरण, एकांकी और रेडियो-नाटक शामिल हैं। चालीस रचनाओं का आकाशवाणी से प्रसारण भी हो चुका है।”

यह मेरा परम सौभाग्य है कि पिछले 30-35 वर्षों से लगभग निरंतर उनसे भेंट करता रहा हूं। गर्मियों में, जब भी मैं देहरादून जाता हूं तो उनसे अवश्य भेंट होती है। हमेशा ही उनका अथाह स्नेह और आशीर्वाद मुझे प्राप्त होता है।

हम लोग शाम को तपोवन की ओर घूमने निकलते रहे हैं और खूब सारी चर्चाएं होती रही हैं। एक-दूसरे के साथ घर पर भी लंबी-लंबी बैठकें और रचनाओं व पुस्तकों का आदान-प्रदान होता रहा है। जब भी उनके घर जाता हूं तो प्रारंभिक चाय-नाश्ते के उपरांत, उनका आग्रह भोजन के लिए अवश्य होता है।

वर्षों पूर्व, उन्होंने मुझे साथ ले जाकर, नगर के अनेकों प्रतिष्ठित साहित्यकारों से मिलवाया, जिनमें रवींद्रनाथ त्यागी, सुभाष पंत और ओमप्रकाश बाल्मीकि शामिल हैं। हम लोग देहरादून के पलटन बाजार भी संग-संग घूमें हैं।

वे बाहर की यात्राएं अधिक नहीं करते हैं। जहां तक मुझे याद है, उन्होंने इंदौर और केदारनाथ की यात्रा की चर्चा ही यदाकदा ही की है।

05 जुलाई 2026 को उनका जन्मदिन था। फ़ोन पर बातें हुईं। वे कुछ अस्वस्थ लगे। पिछले कुछ समय से वे यदाकदा अस्वस्थ रहने लगे हैं। फ़ोन पर ज़्यादा बातें करने की उनकी आदत नहीं है। आमने-सामने बैठकर वो अब भी धारावाहिक गपशप करते हैं। अभी अप्रैल में ही मैं उनके घर पर गया था।

उम्र के 90 गौरवशाली पड़ाव पार करने पर उन्हें एक बार पुनः हार्दिक बधाई और उनके दीर्घायु और स्वस्थ होने के लिए अनंत शुभकामनाएं! 💐🙏

 

© श्री जगत सिंह बिष्ट

(Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.)

इंदौर मध्यप्रदेश 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’≈

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