मोहम्मद जिलानी
(ई-अभिव्यक्ति में वरिष्ठ शिक्षाविद एवं साहित्यकार मोहम्मद जिलानी जी का हार्दिक स्वागत.शिक्षण – बी.ए., बी एड, एम ए (अंग्रेजी, हिंदी, समाजशास्त्र), एम एड विशेष – यू के में एक सप्ताह का शैक्षणिक दौरा. सेवाएं – व्याख्याता (अंग्रेजी और हिंदी) के पद पर सेवाएं प्रदत्त, इसके पश्चात् प्रधानाध्यापक और प्राचार्य पद पर सेवाएं प्रदत्त, तत्पश्चात उप शिक्षा अधिकारी, जिला परिषद् चंद्रपुर के पद से सेवानिवृत्त. अभिरुचि – हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, उर्दू, और तेलुगु भाषा में पठन, लेखन. गीत, संगीत और सिनेमा में भी विशेष अभिरुचि. संप्रति – निदेशक जिलानी ग्रुप ऑफ़ स्कूल्स। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – चिंता मुक्त.)
🌱 लघुकथा – चिंता मुक्त🌷
“चल! भाग यहां से, बदमाश कहीं का” डांटते हुए ट्राफिक सिग्नल पर खड़े पुलिस वाले ने कहा। यह सुनकर भीख मांगने वाला दूर हटते हुए कहने लगा, “साहाब, दो दिन से भर पेट खाने तक के लिए पैसे नहीं मिल रहे है। तो, सोचा सिग्नल पर पैसे वालों की गाड़ियां रूकती है। कुछ ज्यादा पैसे मिल जायेंगे। यह सोच कर..।” यह सुनकर पुलिस वाला चिढ़कर कहने लगा,”अरे! बेवकूफ यही अमीरजादे हमारे अधिकारियों से शिकायत करते हैं कि पुलिस वालों की लापरवाही से ही सिग्नल पर भिखारियों की तादाद बढ़ रही है। अब दुबारा दिखेंगा, तो तीन महिने के लिए अंदर करा दूंगा।”
यह सुनकर भीख मांगने वाला दूर के फ्लाई ओव्हर ब्रिज के नीचे जाकर बैठ़ गया। बैठ़े बैठ़े सोचने लगा,”मैं पढ़ा लिखा होने के बावजूद अपने गांव में मुझे कोई काम नहीं मिल पाया, तो मुंबई आ गया। यहां भी अजनबियों को काम देने से लोग डरते है।”
पिछले तीन महिनों से उसका अपना ठिकाना कभी इस पुल के नीचे, तो कभी उस फुटपाथ पर, और धंदा भीख मांगना रह गया है। कहने को तो उसका नाम सुखवीर था। पर यहां उसे भिखारी के नाम से लोग पुकारने लगे।
दुपहर की गमी॔ से भूख और प्यास बढ़ने लगी, तो सोचा मंत्रालय के सिग्नल पर जाना चाहिए। यह सोचकर सुखवीर सिग्नल के पास जाकर खड़ा हो गया। एक दो गाड़ियों के पास गया भी था। लेकिन ज़ोरदार झिड़कियां ही मिली। कुछ देर और ठहरता, इतने में पुलिस की पेट्रोलिंग जीप आ गयी। उसे दरोगा की कड़क आवाज सुनाई दी. “अरे! कोई इस भिखारी को पकड़कर जीप में डालो। पास में ही मंत्रालय है। इसकी वजह से हमारी नौकरी चली जायेंगी।”
इतने में एक पुलिस वाला जीप से उतरा और उसका कालर पकड़कर जीप में बिठ़ा दिया। थाने पहुंचकर दरोग़ा ने सुखवीर को मंत्री की गाड़ियों के सामने भीख मांगने के जुम॔ में तीन महिने की सज़ा सुना दी।
यह सुनकर सुखवीर को बड़ी ख़ुशी हुई। वह अपने आप से कहने लगा, ” चलो, अच्छा ही हुआ। अब तो तीन महिने के लिए खाने और रहने की चिंता से मुक्ति जो मिल गयी है।”
© मोहम्मद जिलानी
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