श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्रेयस साहित्य # ३२ ☆

☆ लघुकथा ☆ 🇮🇳 जय हिंद की सेना 🇮🇳 ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆ 

 ( लघुकथा )

 

बिटिया बिलख बिलख कर रोये जा रही थी। जबसे शहीद पिता के शव के गांव पहुंचने की खबर मिली, उसके आंसू थमने के नाम ही नही ले रहे थे।

 मां का तो और भी बुरा हाल था। वह दहाड़े मारकर जमीन पर लोटलोट कर रो रही थी। उसके जीवन की गाड़ी थम गई थी। चूड़ियों के खनक गुम हो गयी थी।

पिछले महीने हवलदार जगदेव जब छुट्टी में गाँव आये थे तो अपनी घरइतीन सुखमणि से अपनी एकलौती बिटिया के हाथ पीले करने की चिंता, और उसके लिए एक सुयोग्य वर ढूंढने की बात करते-करते उनकी पूरी रात गुजर गई थी। अपने माई और बाबूजी के बीच हुई चर्चा को, सुमन ने जब से सुना न जाने क्यों उसके दिल में उसके सपनो के राजकुमार के आने की धमक सुनाई देने लगी थी।

लेकिन आज सब कुछ शांत था। न किसी पति-पत्नी के मध्य कोई चर्चा थी न किसी बेटी के दिल में किसी के आने की धमक थी। बस था तो सिर्फ सिर्फ एक कारूणिक मंजर, जहां एक शहीद का शव एक तख़्त पर लिटाया गया था। गांव के हर एक व्यक्ति की आंखों में उस शहीद का चेहरा चमक रहा था लेकिन खुली आंखों से देखने के शव के साथ उसका चेहरा मौजूद नहीं था।

 सेना की टुकड़ी के द्वारा मातमी धुन बजायी जा रही थी। बंदूको से सलामी दिए जाने की रस्म पूरी हुई तो सुमन ने रोते रोते अंजुली भर फूल पिता के चरणों में रख दिए।

 शव को अपने साथ ले आने वाले कैप्टन राघवेंद्र यह सब कुछ देख रहे थे। भीड़ में खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने जब रोते -रोते यह कहा कि अब जगदेव की बिटिया के लिए वर कौन ढूढ़ेगा। उसके हाथ पीले कब होंगे, बगल में खड़े कैप्टन राघवेंद्र के मन में करुणा और मानवता के बादल उमड़ने लगे। सुमन अपने पिता के शव को देखकर दहाड़े मारकर रो रही थी और बेहोश हुए जा रही थी। एक बार तो ऐसा लगा कि सुमन पूरी तरह से बेहोश होकर जमीन पर गिर जाएगी लेकिन बगल में खड़े कैप्टन राघवेंद्र ने उसका हाथ थाम लिया। बेहोश सुमन को कैप्टन के मजबूत बाहों ने जमीन पर गिरने से रोक लिया।

 कैप्टन राघवेंद्र के दिल में उमड रहे मानवता और करुणा के बादल शांत नदी के नीर के रूप में बदल गए थे। यहां से उनके मन में चिंतन प्रारंभ हो गया था।

 इस दर्दनाक घटना के बीते कई महीने गुजर गए। आज बहुत दिनों बाद शहीद हवलदार जगदेव के घर पर मातमी धुन की जगह शुभ मंगल शहनाई की धुन बज रही थी। बरात शहीद के घर की तरफ पहुंची, तो भीड़ में खड़ा हर कोई व्यक्ति दूल्हे के चेहरे को देखना चाहता था।

पर यह क्या !! आज गाँव का हर कोई यह दृश्य देखकर आश्चर्यचकित और खुशी से झूम रहा था जब कैप्टन राघवेंद्र फौजी वर्दी में नहीं बल्कि दूल्हे के वेश में सुमन का हाथ था में जयमाल मंडप की तरफ बढ़ रहे थे।

लोगो ने जब अपनी स्मृतियों को खंघाला तो उन्हें बीते दिनों का वह दृश्य दिखाई दे रहा था, जब दूल्हे के वेश में खड़े इस नौजवान ने फौजी के वेश में बेहोश होकर जमीन पर गिर रही सुमन का हाथ थामा था।

 बटालियन की वही टुकड़ी आज एक बार फिर शहीद हवलदार जगदेव के दरवाजे पर बाराती के भेषभूषा में खड़ी थी। लाल जोड़े में सजी सुमन ने कैप्टन राघवेंद्र के गले में वरमाला डाला तो कैप्टन राघवेंद्र ने एक जयमाला सुमन को भी पहना दिया। हवलदार जगदेव के दरवाजे पर खड़ी भीड़ ने भारत माता की जय के उद्घोष के साथ फूलों की वर्षा की तो कैप्टन राघवेंद्र और सुमन ने भी शहीद हवलदार जगदेव के चित्र पर पुष्पांजलि की। शहनाई की धुन बज रही थी। प्रत्येक दिशाओं में मंगल मंगल हो रहा था और एक अनोखा दृश्य उभर कर आ रहा था।

 भारतीय सेना के एक जवान ने आज सीमा पर नहीं बल्कि समाज के बीच एक अलग मिसाल पेश करते हुए, सबका दिल जीत लिया था। सबकी नज़रें नम थी और सभी कैप्टन राघवेंद्र को हृदय से बधाई दे रहे थे।

♥♥♥♥

© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”

लखनऊ, उप्र, (भारत )

दिनांक 22-02-2025

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments