श्री सुहास रघुनाथ पंडित
कविता
☆ अकेला? ☆ श्री सुहास रघुनाथ पंडित ☆
(श्री सुहास रघुनाथ जी की मराठी कविता “एकटा ?” का उनके ही द्वारा हिंदी भावानुवाद. आप उनकी मराठी कविता इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं 👉 मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ एकटा? ☆ श्री सुहास रघुनाथ पंडित ☆)
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“आप अकेले ही रहोगे? “
जब तुम पूछती हो, तब,
सचमुच मुझे आती है हंसी!
कहा हूँ मैं अकेला?
साथ में होते हैं ना
ये शब्द, कल्पना और
हमारे ख्वाब!
सचमुच,
हम अकेले ही आये हैं
और अकेले ही जाएंगे
वैसे कितना भी कहो ,
किन्तु, वह सच नहीं है !
पैदा होते ही, होते हैं साथ
ख्वाब हमारे उज्वल भविष्य के
और जाते समय
होती है हमारे पास
जीवन भर के यादों की गठरी !
तो बताओ, कैसा हूँ मैं अकेला?
भीड़ में तो अकेला नहीं
और एकांत मे भी
मैं अकेला नहीं होता,
मेरे अंदर होती है
एक नगरी ख्वाबों की
और
साम्राज्य स्मृतियों का
तो बताओ
मैं अकेला कैसा?
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© श्री सुहास रघुनाथ पंडित
सांगली (महाराष्ट्र)
मो – 9421225491
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




