प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे
☆ एक मुट्ठी आसमाँ ☆ प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे ☆
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करो जागरण अंतर्मन का,मन संकल्प सजाओ।
करना है जो कर ही डालो,रोग दूर कर जाओ।।
बंधु ज़रा ! निज मन की बात मानकर तो देखो।
एक मुट्ठी आसमाँ ज़रा हासिल कर तो देखो।।
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साहस का भाव निभाकर,संयम ह्दय जगाओ।
करना है जो,कर ही डालो,मंज़िल को पा जाओ।।
ख़ुद की कमियों को ज़रा ईमानदारी से लेखो।
ज़रा,एक मुट्ठी आसमाँ हासिल कर तो देखो।।
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जीवटता से तो मार्ग स्वास्थ्य का मिल जाता है।
सब कुछ होना,इक दिन हम में बल लाता है।।
करना है जो,कर ही डालो,मंज़िल को पा जाओ।।
ज़रा,एक मुट्ठी आसमाँ हासिल कर तो देखो।।
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रीति-नीति के पथ पर चल,मंगल को तो पाओ।
अंधकार को परे हटाओ,हथेली पर नूर उगाओ।।
इंसानी जज़्बातों को संग ले जीवन को लेखो।
ज़रा,एक मुट्ठी आसमाँ हासिल कर तो देखो।।
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© प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे
प्राचार्य, शासकीय महिला स्नातक महाविद्यालय, मंडला, मप्र -481661
(मो.9425484382)
ईमेल – khare.sharadnarayan@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




