श्री यशोवर्धन पाठक
☆ पुस्तक चर्चा ☆ “मेरे अपने” – स्व. डा. प्रार्थना राजेंद्र अर्गल ☆ समीक्षा – श्री यशोवर्धन पाठक ☆
☆ स्व. डा. प्रार्थना राजेंद्र अर्गल की कृति – “मेरे अपने” – श्री यशोवर्धन पाठक ☆
(सुप्रसिद्ध महिला साहित्यकार डा. प्रार्थना राजेंद्र अर्गल का विगत दिनों स्वर्गवास हो गया। वे एक चर्चित रचनाकार थीं । गद्य और पद्य दोनों ही में उन्होंने प्रभावी और पठनीय सृजन किया। पूर्व में लिखी गई उनकी कृति मेरे अपने पर पुस्तक समीक्षा सादर स्मरण विनम्र श्रद्धांजली सहित अवलोकनार्थ प्रस्तुत है।)
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साहित्यिक क्षेत्र में पिछले दिनों सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती प्रार्थना अर्गल जी की साहित्यिक रचनाओं की एक ऐसी कृति सामने आई है जिसमें गद्य और पद्य की उनकी उत्कृष्ट और सराहनीय रचनाओं का समावेश है। ऐसी कृतियों की एक विशेषता यह होती है कि गद्य और पद्य के प्रशंसक पाठकों को अपनी पसंद की रचनाएँ पढने की सुविधा रहती है।
सुपरिचित साहित्यकार डा प्रार्थना राजेन्द्र अर्गल लखनवी की यह साहित्यिक कृति 134 रचनाओं का एक खूबसूरत गुलदस्ता है जिसमें पठनीय कविताएँ, कहानियाँ, लघु कथायें, संस्मरण और चिंतन आलेख शामिल हैं।
इस कृति की शुरुआत एक कविता से की गई है जो कि मेरे बाबूजी के शीर्षक से लिखी गई पिता को विनम्र श्रद्धांजलि है। अन्य रचनाएँ विभिन्न विधाओं पर आधारित हैं। इन कविताओं में मां नर्मदे को लेकर रक्षाबंधन, बसंती मौसम, अंजनि पुत्र, बगीचा , तिरंगा, प्रकृति, मोबाईल, नये वर्ष का स्वागत, प्यार का इज़हार, चांद, नारी, आशीर्वाद सुख दुःख, लेखनी, राजा रानी, मधुर स्मृतियाँ, माँ जैसे शीर्षक से अनेक प्रभावी और भावनात्मक कविताएँ सम्मिलित हैं।
इस महत्वपूर्ण पुस्तक में सामाजिक स्थितियों पर केन्द्रित अनेक लघु कथायें भी पाठकों को पढ़ने को मिल सकती हैं। अतिथि, क्या वो दिन थे, आशीर्वाद, जहर, पन्ना, दानवीर जैसी लघु कथायें भी पाठक वर्ग उत्सुकता और रोचकता के साथ पढ़ेगा। कृति में बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम, शांति धाम, व्यवस्था जैसे शीर्षक के साथ अनेक चिंतन परक सारगर्भित लेख हैं जिसे पढ़ कर पाठक जरूर कुछ नया सोचने को बाध्य होगा।
कृति में नल जैसे विषय पर संस्मरण भी पठनीय है। अतिथि संतुष्ट हो जायेगा जैसे विषय पर लोगों को पढ़ने के लिए रोचक कहानी भी शामिल है।
आदरणीया प्रार्थना जी ने इस कृति में समाज और साहित्य के प्रेरक व्यक्तित्व को भी सस्नेह सम्मिलित किया है। गीत पराग की प्रधान संपादक डा गीता गीत पर केन्द्रित उनकी कविता भी सराहनीय है।
कृति के प्रारंभ में आदरणीया श्रीमती साधना उपाध्याय, श्रीमती अर्चना मलैया, श्रीमती निर्मला तिवारी, श्रीमती अलका मधुसूदन पटैल और श्री विजय नेमा अनुज जैसे उत्कृष्ट साहित्य साधकों ने अपनी मंगलकामनायें व्यक्त करते हुए प्रार्थना जी की कृति को साहित्यिक क्षेत्र की एक प्रभावी, पठनीय और प्रेरणा दायी कृति निरूपित किया है।
इस कृति के प्रारंभ में ही आदरणीया डा प्रार्थना राजेन्द्र अर्गल लखनवी ने कृति के शीर्षक मेरेे अपने के औचित्य और उसके सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए उनके सभी मेरे अपनों के प्रति आभार और आदर व्यक्त किया है जिन्होंने उन्हें इस कृति के प्रकाशन के लिए प्रोत्साहित और प्ररित किया है।
मुझे भी विश्वास है कि साहित्यिक क्षेत्र में भी यह कृति पठनीय और लोकप्रिय सिध्द होगी।
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© श्री यशोवर्धन पाठक
पूर्व प्राचार्य, राज्य सहकारी प्रशिक्षण संस्थान, जबलपुर
संपर्क – डा. मिली गुहा अस्पताल के पीछे, गुप्तेश्वर, जबलपुर, मोबाइल 9407059752
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈







