डॉ. रामेश्वरम तिवारी
संक्षिप्त परिचय
- हिंदी-प्राध्यापक(सेवानिवृत्त) महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल (म.प्र).
- नई दुनिया, दैनिक भास्कर, वीणा, हंस, धर्मयुग, कादम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविता और लघुकथाएँ प्रकाशित। पुस्तकः कविता के ज़रिए, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित।
आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय व्यंग्य – फैंटसीः अथः वनराज-गजराज संवाद…
☆ ॥ व्यंग्य॥ फैंटसीः अथः वनराज-गजराज संवाद ☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी ☆
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वनराज- ‘गजराज! सुना है कि मार्जारी के राज्य में चुनाव हो रहे हैं।’
गजराज- ‘महाराज! आपने बिल्कुल सही सुना है। आजकल दुनिया के अधिकांश देशों में प्रजातंत्र का बोलबाला है। हमारे समुदाय के वन्य प्राणियों में भी जो नगरीय क्षेत्रों में रहते हैं वहाँ पर भी हर पाँच साल में चुनाव होने लगे हैं। जिसे विरोधी जंगलराज की संज्ञा से अभिहित करते हैं।’
वनराज- ‘ये तो बहुत अच्छी बात है। इस प्रणाली में कम से कम उनको भी अपने मन के मुताबिक़ अपने मुखिया का चयन करने और सरकार बनाने का मौक़ा मिलता है। अब जरा यह भी बतलाओ कि मार्जारी के पक्ष में कौन हैं और उसके विरोध में कौन हैं…?’
गजराज- ‘महाराज! मार्जारी बड़ी चतुरी और चालाक है। वह बहुत पहले से ही मूषकों, छिपकलियों, सरि-सृपों आदि को दूध-रोटी का प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने का जुगाड़ कर चुकी है।’
वनराज- ‘और उसके विरोध में कौन हैं…?और उनकी तैयारी के बारे में जरा विस्तारपूर्वक प्रकाश डालें। मेरी जिज्ञासा बढ़ती जा रही है।’
गजराज- ‘राजन्! मार्जारी के विरोध में मुख्य रूप से श्वान दल दावेदार है। बाक़ी सियारों और कौओं के दल को तो वह बहुत पहले ही वाट लगा चुकी है।’
वनराज- ‘गजराज! तुम हम सभी प्राणियों में सबसे अधिक बुद्धिमान हो। जरा सोच-विचारकर बतलाओ कि इस बार के चुनाव में मार्जारी के राज्य में किसकी जीत होने जा रही है।’
गजराज- ‘स्वामी! वैसे, तो पिछली बार श्वानों के दल ने अपनी सीटों में अच्छा-ख़ासा इज़ाफ़ा कर लिया था। अगर वह पिछली बार की तुलना में अपनी सीटों को दोगुना कर लेता है, तो निश्चित रूप से जीत का सेहरा उसके सिर पर बँध सकता है और अपनी सरकार बना सकता है, पर राजन्! मार्जारी खेला करने में बड़ी माहिर है। ऊँट को किस करवट बैठाना है वह इस कला की मास्टर माइंड है।’
अतः महाराज! फ़िलहाल किसी भी निर्णय पर पहुँचना ज़रा जल्दबाज़ी होगी। दोनों खेमों की ओर से ब्लास्स्टिक मिसाइलें दागी जा रही हैं। किसका सर कलम होगा, किसके लहू से धरती रक्तरंजित होगी, आज की तारीख़ में कहना बड़े से बड़े ज्योतिषी द्वारा भविष्यवाणी मुश्किल है। हाँ! बुद्धिजीवियों द्वारा जरूर हवा में तीर-तुक्के छोड़े जा रहे हैं। मेरे देखे, तो जैसे-जैसे मतदान की तारीख़ नज़दीक आ रही है, वैसे-वैसे दिन-प्रतिदिन चुनावी जंग बड़ी रोचक और काँटे की हुई जा रही है।
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© डॉ. रामेश्वरम तिवारी
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