डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं  आपका संस्मरणात्मक आलेख – माँ की पुण्यतिथि पर शत शत नमन)

☆ – स्मृतिशेष डॉ गायत्री तिवारी विशेष –  माँ की पुण्यतिथि पर शत शत नमन ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

वो  दिन हम भूले नहीं, छोड़ा माँ ने साथ।

लहर-लहर आंचल उड़ा, उठता सिर से हाथ।।

माँ, आप भले ही आज हमारे बीच सशरीर नहीं हैं, पर आपकी ममता, आपकी कहानियाँ, आपकी लेखनी और आपके दिए संस्कार आज भी हमारे जीवन में साँस लेते हैं। अंतर्मन  को यह सोचकर पीड़ा होती है कि साथ का समय कुछ और मिलता, तो आपसे बहुत कुछ कहना था, बहुत कुछ सुनना था। माँ का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं होता, वह घर से एक पूरी दुनिया, एक छाँव और एक आवाज़ का चले जाना होता है।

समय बीतता जाता है, जीवन अपनी गति से चलता रहता है, लेकिन माँ की स्मृतियाँ मन के उस कोने में हमेशा जीवित रहती हैं, जहाँ समय भी पहुँचकर उन्हें धुँधला नहीं कर पाता।

आपने साहित्य को केवल लिखा नहीं, जिया है। एक श्रेष्ठ कहानीकार और वरिष्ठ साहित्यकार के रूप में आपकी रचनाएँ आपकी संवेदना की पहचान हैं। लेकिन, हमारे लिए आपकी सबसे बड़ी विरासत आपकी रचनाएँ ही नहीं, बल्कि वे संस्कार और जीवन-मूल्य हैं जो आपने हमें दिए।

  माँ, आपकी यादों में ये पुष्प सादर अर्पित हैं।

🌸

आई माँ की  याद है, भर आये  हैं नैन.

मिले मुझे माँ हर जनम, तभी मिलेगा चैन॥

 *

माँ की ममता की छुअन, मन में मेरे पास।

संस्कार अच्छे दिए, है जीवन  मधुमास।।

 *

कहानी के हर शब्द में, माँ की है मुस्कान।

देती लेखनी उनकी, जीवन-पथ को जान।।

 *

जल्दी हमसे दूर हुईं, रह गई मन में पीर।

कहना-सुनना रह गया, बहे आँखों से नीर  ॥

 *

उनसे सीखा प्रेम को, शब्दों का आधार ।

उनने हमको दे दिया, जीने का संस्कार ॥

🌸

शत-शत नमन।

शत-शत विनम्र श्रद्धांजलि।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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