श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं, कविता /गीत का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य शृंखला में आज प्रस्तुत है आपकी एक कविता “कृष्ण जन्माष्टमी विशेष – बाल कन्हैया छबि अति प्यारी ”।)
☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २७६ ☆
🙏🪷कृष्ण जन्माष्टमी विशेष – बाल कन्हैया छबि अति प्यारी 🪷🙏
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नयन खोल देखें नट नागर, घर-घर सुंदर साज।
बाल कन्हैया छबि अति प्यारी, जन्मोत्सव है आज।।
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कोई साजे मोतियन माला, चौंक पुराये द्वार।
स्वर्ण कलश ले दीया बाती, पुष्प माल ले हार।।
सांवरिया की सूरत प्यारी, चरण पखारे काज।
बाल कन्हैया छबि अति प्यारी, जन्मोत्सव है आज।।
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छेड़े गोपी रास रचायें, मथुरा नगरी धाम।
गिरधर माधव कान्हा छलिया, माखन चोरी काम।।
वेणु अधर बजाये गोविंद, मधुर- मधुर आवाज।
बाल कन्हैया छबि अति प्यारी, जन्मोत्सव है आज।।
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यमुना तट पर खेलें कान्हा, ग्वालन करती प्रीत।
मनमोहन की नटखट बातें, गाती सुंदर गीत।।
मटकी फोड़े माखन खायें, पिता नंद का राज।
बाल कन्हैया छबि अति प्यारी, जन्मोत्सव है आज।।
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धराधाम पर भगवन आये, लेकर प्रेम अपार।
बने द्वारिकाधीश यहीं पर, गीता मुख है सार।।
युगों-युगों से कान्हा आयें, सुंदर बना रिवाज।
बाल कन्हैया छबि अति प्यारी, जन्मोत्सव है आज।।
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हे गिरधारी कृष्ण मुरारी, नंद यशोदा लाल।
केशव माधव मोहन कान्हा, बनें कंस के काल।।
शीलू कहती हे नारायण, रखना मेरी लाज।
बाल कन्हैया छबि अति प्यारी, जन्मोत्सव है आज।।
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© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






