श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी  के साप्ताहिक स्तम्भ  “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है “मनोज के दोहे”। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।

✍ मनोज साहित्य # 180 – मनोज के दोहे  ☆

सत्य अहिंसा मार्ग पर, मिलें पुष्प के हार।

सामाजिक परिवेश में, जीवन है गुलजार।।

 *

सुखद कर्म की नींव पर, करें भव्य निर्माण।

हों प्रसिद्ध इतिहास में, अमर रहे निर्वाण।।

 *

राजपाट को त्याग कर, बोधिसत्व पर ध्यान।

पूज्य हुए सिद्धार्थ जी, सच्चा उपजा ज्ञान।।

 *

तथागत के संदेश से, भटकें हैं कुछ देश।

लोभ-लालसा में फँसे, बढ़ा रहे हैं क्लेश।।

शक्ति-मार्ग से जा रहा, प्रेम-शांति संदेश।

बुद्ध-युद्ध के द्वंद्व में, हँसता है परिवेश।।

©  मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002

मो  94258 62550

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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