श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” ज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # 141 ☆ देश-परदेश – जंग, मोहब्बत और तिजारत में सब जायज़ है ☆ श्री राकेश कुमार ☆

पुरानी कहावत हुआ करती थी, कि प्यार और युद्ध में सब चलता हैं। इसमें कुछ समय से व्यापार भी जुड़ गया हैं। वो समय और था, जब व्यापार में नैतिकता पर ज़ोर रहता था।

बचपन में एक कहानी सुनी थी, कि एक व्यक्ति दस रुपए में तोता बेच रहा था, जबकि अन्य लोग बीस रुपए में तोता बेच रहे थे। दस रुपए में तोता बेचने वाला पक्षी का पिंजरा बहुत महंगा बेच रहा था। बिना पिंजरे के तोता तो खरीदा नहीं जा सकता हैं। कुल मिला कर सस्ते तोता बेचने वाला अधिक लाभ कमा रहा हैं।

सत्तर के दशक में सरकारी राशन की दुकान पर सस्ती चीनी की बिक्री होती थी। राशन विक्रेता चीनी की बिक्री के साथ गेहूं भी जबरदस्ती बेचता था।

आज भी हमारे मोहल्ले में सरकारी डेयरी का दूध विक्रेता इस बात से नाराज़ रहता है, कि ब्रेड, मक्खन आदि दूसरी दुकान से क्यों खरीदते हो? जबकि  दूध कियोस्क से अन्य सामान बेचना अनधिकृत हैं।

उपभोक्ता हमेशा किसी ना किसी रूप में दबाया जाता रहा हैं। कस्टमर हमेशा कष्ट से ही मरता हैं। देश में उपभोक्ता सरंक्षण के लिए बहुत सारी संस्थाएं कार्य कर रही हैं। इसके बावजूद भी ग्राहक कहीं ना कहीं मात खाता हैं।

विश्व व्यापार में भी बहुत सारी संस्थाएं हैं। मुक्त व्यापार से लेकर भुगतान के लिए अनेक देशों ने नए नए समूह भी बनाएं गए हैं। MRTP नियम भी बनाया गया हैं।इन सब के होते हुए आज भी  तीसरी दुनिया देशों के हित सुरक्षित नहीं हैं।

बड़े देश बस हथियार, और विमान बनाकर अपना साम्राज्य चलाते हैं। छोटे देशों से कपड़े, घरेलू सामान आदि खरीदते हैं। विश्व व्यापार में  कुछ देश स्वयंभू नेतागिरी भी करते है, अपने निजी हितों को साधते हुए अन्य देशों को अपने प्रभाव से तंग करने में लगें रहते हैं।

टीप : इस आलेख का वर्तमान में “पूंजीपति देशों के सिरमौर” द्वारा नए टैरिफ नियम लागू करने से कोई दूर दूर तक सम्बन्ध नहीं हैं।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments