श्री सुरेश पटवा

(श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं। आपकी पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “गुलामी की कहानी, पंचमढ़ी की कहानी, नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास) एवं  तलवार की धार को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है। अब आप प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकते हैं यात्रा संस्मरण – गंगा-सागर यात्रा)

? यात्रा संस्मरण – गंगा-सागर यात्रा – भाग-१० ☆ श्री सुरेश पटवा ?

बिड़ला तारामंडल

बिड़ला तारामंडल कोलकाता के सबसे आकर्षक पर्यटक स्थलों में से एक है। जो एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा तारामंडल है! कोलकाता बिरला तारामंडल 2 जुलाई 1963 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्थापित किया गया था। बिड़ला तारामंडल में एक इलेक्ट्रॉनिक्स प्रयोगशाला, खगोल विज्ञान गैलरी और खगोलीय मॉडल का संग्रह मौजूद है। जो पर्यटकों और विज्ञान प्रेमीयों  के लिए आकर्षण के केंद्र बने हुए है। बिड़ला तारामंडल में पर्यटकों के आकर्षण के लिए नियमित रूप से कई शो आयोजित किये जाते है जो हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली और अन्य क्षेत्रीय भाषायों में संचालित होते है। शो के दौरान नौ ग्रहों का एक दौरा उनके बारे में दिलचस्प विवरण और हमारे ब्रह्मांड में मौजूद अन्य आकर्षक खगोलीय पिंडों पर चर्चा की जाती है। जहाँ आप ग्रहों, खगोलीय पिंडों और विज्ञान संभंधित अन्य जानकरी प्राप्त कर सकते हैं।

समय की कमी होने से इसे बाहर से देखकर ही संतोष किया।

भारतीय संग्रहालय

“सिटी ऑफ़ जॉय” के नाम से प्रसिद्ध कोलकाता में स्थित भारतीय संग्रहालय दुनिया का नौवाँ सबसे पुराना संग्रहालय है। इसे तरीक़े से घूमने के लिए दो-तीन चाहिए। हमने एक बड़ा चक्कर लगाया। इसकी नीव वर्ष 1814 में रखी गई थी और तब से यह बहु-विषयक गतिविधियों का केंद्र है। ‘जादुगर’ के नाम से मशहूर भारतीय संग्रहालय समकालीन चित्रों, बुद्ध के पवित्र अवशेष, मिस्र की ममियों और प्राचीन मूर्तियाँ, आभूषणों, जीवाश्मों, कंकालों, प्राचीन वस्तुओं, बाजूबंदों और तेजस्वी मुगल चित्रों के कुछ अति उत्तम संग्रह हैं। जो भारत के अतीत को प्रदर्शित करते है और पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए लोकप्रियता के बिषय बने हुए है। संग्रहालय में 35 दीर्घाएँ हैं, जिन्हें कला, पुरातत्व, नृविज्ञान, भूविज्ञान, जूलॉजी और आर्थिक वनस्पति विज्ञान नामक छह श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इतिहास के बारे में जिज्ञासु लोगों के लिए, संग्रहालय परिसर के भीतर एक पुस्तकालय और किताबों की दुकान भी मौजूद है। भारतीय संग्रहालय पर्यटकों के साथ-साथ इतिहास प्रेमियों के घूमने के लिए कोलकाता के सबसे आकर्षक जगहों में से एक है।

बिरला मंदिर

लगभग 130 एकड़ के विशाल छेत्र में फैला हुआ बिरला मंदिर, कोलकाता के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। बिरला मंदिर का निर्माण वर्ष 1970 में शुरू होने के बाद  21 फरवरी 1996 को 26 वर्षों बाद पूर्ण हुआ। मंदिर में मुख्य देवता राधा–कृष्ण के साथ भगवान गणेश, भगवान हनुमान, भगवान शिव, भगवान विष्णु और देवी दुर्गा के दस अवतार के दर्शन किए। बिरला मंदिर का निर्माण नक्काशीदार सफेद संगमरमर से किया गया है भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित बिरला मंदिर कोलकाता का महत्वपूर्ण आस्था केंद्र है जो पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों के घूमने के लिए सबसे मनोरम स्थल बना हुआ है जहाँ पर्यटक राधा -कृष्ण के दर्शन और मंदिर के सुखद व आनादमयी माहोल में समय व्यतीत पसंद करते है। इसके अलावा मंदिर में जन्माष्टमी बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई जाती है जिसमे बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते है।

अलीपुर जू

अलीपुर जू जिसे कलकत्ता चिड़ियाघर या अलीपुर का प्राणी उद्यान भी कहा जाता है, अलीपुर जू  भारत में स्थापित सबसे पुराना प्राणि उद्यान है और कोलकाता का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। 46.5 एकड़ के क्षेत्र में फैला, चिड़ियाघर 1876 से संचालित हो रहा है जो बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करता है। अलीपुर चिड़ियाघर रॉयल बंगाल टाइगर, हाथी, वन-सींग वाले गैंडे, व्हाइट टाइगर, ज़ेबरा, मृग, हिरण ,मैकॉव और लोरिकेट, स्वाइनहो के तीतर, लेडी एमहर्स्ट के तीतर और गोल्डन तीतर, शुतुरमुर्ग, ईमू, हॉर्नबिल्स जैसे बड़े पक्षियों का घर है। सर्दियों के मौसम के दौरान, अलीपुर चिड़ियाघर कुछ प्रवासी पक्षियों जैसे सुरस क्रेन का निवास स्थान भी बन जाता है। अलीपुर चिड़ियाघर प्रकृति के प्रति उत्साही लोगों के लिए या अपने बच्चों और परिवार के साथ घूमने जाने के लिए कोलकाता के लोकप्रिय जगहों में से एक है।

पार्क स्ट्रीट कोलकाता की एक सड़क है जिसे मदर टेरेसा सरानी के रूप में भी जाना जाता है। रात होते होते यहाँ पहुँचे। पार्क स्ट्रीट कोलकाता की सड़क के साथ-साथ प्रमुख हैंगआउट स्पॉट और एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल भी है क्योंकि पार्क स्ट्रीट एक ऐसा स्पॉट है जो कभी सोता नहीं है और हमेशा हलचल और गतिविधियों से भरा हुआ होता है। पार्क स्ट्रीट में कई बदलाब किये गए है जो इसे एक लोकप्रिय स्थल और हैंगआउट स्पॉट बनाते हैं। पार्क स्ट्रीट शहर का एक ऐसा क्षेत्र है, जहां 5-सितारा रेस्तरां और होटल, नाइट क्लब, मॉल और कई रेस्टोरेंट मौजूद हैं। जहाँ पर्यटक देशी-विदेशी खाना और बिभिन्न गतिबिधियों को एन्जॉय कर सकते हैं। पार्क स्ट्रीट में हमेशा त्योहारों जैसे धूमधाम रहती है और यह सड़क बिशेष रूप से दीवाली, क्रिसमस और नए साल की पूर्व संध्या के अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करती है।

कोलकाता शहर स्थानीय बंगाली व्यंजनों के लिए सबसे अधिक जाना जाता है, जो कि यहाँ आने वाले सभी पर्यटकों के वीच लोकप्रिय बने हुए है। अधिकांश बंगाली व्यंजन भोजन चावल और मछली के चारों ओर घूमते हैं। और यहाँ बंगाली व्यंजनों के अलावा, शहर के विभिन्न रेस्टोरेंट में बढ़िया अंग्रेजी भोजन, कॉन्टिनेंटल, उत्तर भारतीय व्यंजन, दक्षिण भारतीय व्यंजन, मैक्सिकन और इतालवी भोजन का आनंद ले सकते हैं। आपको तिब्बती भोजन का एक उदाहरण भी मिलेगा, जिसमें मोमोस और थुप्पा काफी लोकप्रिय और व्यापक हैं। इसके अलावा कोलकाता शहर बंगाली मिठाइयाँ रसगुल्ला, चमचम, रसमलाई, शोंडेश, क्रीम चुप और अन्य बंगाली मिठाइयाँ के पेशकश भी करता है। एक मिठाई की दुकान से रसगुल्ला और चमचम ख़रीद कर पैक करवा लिए। नज़दीक की दुकान से बंगाली कचौड़ी का स्वाद चखा।

इस प्रकार हमारी गंगा सागर-कलकत्ता संपन्न  हुई। हम भोपाल लौटने को दमदम हवाई अड्डा पर अड्डा ज़माए हैं। विचार आ रहा है कि किसी ज़माने में कलकत्ता इतना खूबसूरत शहर था कि मिर्ज़ा ग़ालिब जब पेंशन बढ़वाने की अर्ज़ी लेकर कलकत्ता पहुँचे तो उस पर फ़िदा होकर उन्होंने यह ग़ज़ल लिखी थी।

कलकत्ते का जो ज़िक्र किया तूने हमनशीं,

इक तीर मेरे सीने में मारा के हाय हाय।

वो सब्ज़ा ज़ार  हाय मुतर्रा के है ग़ज़ब,

वो नाज़नीं बुतान-ए-खुदारा के हाय हाय।

 *

सब्र आज्मा वो उन की निगाहें के मुंतज़िर,

ताक़त रूबा वो उन का इशारा के हाय हाय।

 *

वो मेवा हाये  ताज़ा-ए-शीरीं के वाह वाह,

वो बादा हाये नाब-ए-गवारा के हाय हाय।

वे तो कलकत्ता में बसना चाहते थे नगर उनसे दिल्ली के बल्लीमारा की क़ासिम गली नहीं छूटती थी। हमसे भी भोपाल की मीनाल रेजीडेंसी नहीं छूटती। रात के नौ बज रहे हैं। वायुयान में दिल्ली उड़ान की बोर्डिंग शुरू हो चुकी है। ग्यारह बजे दिल्ली उतरेंगे। वहाँ से सुबह छै बजे भोपाल उड़ान है। घर पहुँच तकिया से टिककर कम्फर्ट जोन में राहत की सांस लेंगे। अलविदा कलकत्ता।

18 जून को 2023 को दोपहर 02:00 बजे दिल्ली की उड़ान पकड़नी थी इसलिए 11:00 बजे होटल से हवाई अड्डा पहुंच गए। उड़ान नियत समय ओर उड़ी। 05:30 पर दिल्ली पहुंच गए। अब पूरी रात दिल्ली बावड़ी अड्डा पर गुजारनी थी। 19 जून 2023  को सुबह-सुबह 06:00 बजे भोपाल की उड़ान है। दो घंटा इधर-उधर भटकने के पश्चात आराम कुर्सियां नसीब हुईं। उन पर पसरकर सोने की कोशिश की, लेकिन मजाल है शोरशराबे के कारण झपकी भी आ जाए। आखिर में परेशान होकर अपना चादर निकाला, तौलिया में कपड़े लपेट कर तकिया बनाया, सूटकेस पर पैर पसार एक लंबी नींद निकाली। पाँच बजे चेक-इन करके हवाई जहाज में सवार होकर साढ़े आठ बजे भोपाल विमानतल पर उतर कर घर पहुँचे, पूरे दिन सोकर गुजारा।

– समाप्त –

© श्री सुरेश पटवा 

भोपाल, मध्य प्रदेश

*≈ सम्पादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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