श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं, कविता /गीत का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य शृंखला में आज प्रस्तुत है सामाजिक विमर्श पर आधारित विचारणीय लघुकथा “अनंत शुभकामनाएं”।)
☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २३८ ☆
🌻लघु कथा🌻 अनंत शुभकामनाएं 🌻
सोशल मीडिया पर वायरल बधाईयाँ, फूल- पत्ती, भगवान के चित्र, फिल्मी गाने के बोल – – – क्यों कि बधाईयाँ और शुभ मंगल भाव, ह्रदय से नहीं केवल डिलीट और फारवर्ड पर टिका है।
चरण स्पर्श कर दीर्घायु हों, स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद अब सपना हो गया। किसी को मिला भी तो डिलीट और फारवर्ड 🙏
अब सिर्फ किस्से कहानियों पर ही सिमट चला। सारी बधाईयाँ और मंगल भाव।
Congratulations for both of you. God bless you. बस यही देखते रह गये।
सोहन मेसेज लिख रहा था – – पत्नी ने खूब सारा प्यार और दुलार के साथ आशीर्वाद लिखवा रही थी बेटा बहु को।
क्या? मैने जैसा कहा – आपने वो सब लिख दिया। सोहन इसके पहले कुछ बोलता बेटे का मेसेज आया – – – Happy Ganesh!!
चुपचाप लिखे मेसेज को डिलीट कर सोहन लिख दिए – – – Same to you
ऐ जी खूब सारा आशीर्वाद लिखे कि नहीं? जैसा तुम चाहती थी मैने वो सब लिख दिया।
आप कितने अच्छे हैं, चरण छूते भगवती ने पति से कहा-पति देव गले लगाते, अश्रु छुपाते बोले–तुम्हारी सारी इच्छाएं पूर्ण हो।
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© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





