सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीतश्याम पधारो

? रचना संसार # ८२ – गीत – श्याम पधारो…  ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ? ?

रक्षक बनकर श्याम पधारो,

ले लो  फिर अवतार।

पावन भारत की धरती पर,

अब जन्मो करतार।।

*

घोर निराशा मन में छाई,

मानव है कमजोर।

काम क्रोध मद मोह हृदय में,

थामो जीवन डोर।।

शरण तुम्हारी कान्हा आए,

तिमिर बढ़ा घनघोर।

अब भी चीर दुशासन हरते,

दुष्टों का है जोर।।

सतपथ में बाधक बनते हैं,

बढ़ते अत्याचार।

*

गीता का भी पाठ पढ़ा दो,

व्याकुल होते लाल।

नैतिकता की दे दो शिक्षा,

बन कर सबकी ढाल।।

आनंदित इस जग को कर दो,

चमकें सबके भाल।

धर्म सनातन हो आभूषण,

बदले टेढ़ी चाल।।

राग छोड़कर पश्चिम का हम,

रखें पूर्व संस्कार।

*

त्याग समर्पण पाथ चलें नित,

हमको दो वरदान।

शील सादगी को अपनाकर ,

नित्य करें उत्थान।

सत्य निष्ठ गंम्भीर बनें हम,

दे दो जीवन दान।

जीवन सार्थक कर लें अपना,

कृपा करो भगवान।।

मर्यादा के रक्षक प्रभु तुम,

जग के पालनहार।

© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)

संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268

ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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