श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘परम प्रेम…’।)

☆ शशि साहित्य # १४ ☆

? कविता – परम प्रेम… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

❣️❣️❣️❣️

आज राधा ने मुख पर घूंघट है डाला,

श्याम की बेचैनी बढ़ती जाए..

देखी जाए ना सही जाए,

ऐसी हो गई कृष्ण की हाला..

हो गए “हिय प्यारी”  के दर्शन दुर्लभ,

मनवा हो गया बावरा..

सौ सौ चांद सा चमक रहा,

पर कृष्णा मेघ ने पेहरा डाला..

छलिया नित लीला करें,

करें नित नए प्रयास,

देख शरारत राधे की

अति व्याकुल हो गए आज..

हृदय  लगन लगी बस दरस की,

सजल नयन करे मनुहार..

प्राण प्रिय को व्याकुल देख,

विचलित हो गई कृष्ण प्रिया..

सरक गया कब घूंघट मुख से,

पल भर भी ना समय लगाया..

निरख अनुपम रूप को,

हो गए श्याम अनूप…

कृष्ण उर में बसे राधिका,

राधामय भये घनश्याम..🙏

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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