सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – धुन

? रचना संसार # ८३ – गीत – धुन…  ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ? ?

वेणु की प्रभो प्यारी धुन है,

हे मनमोहन हे गिरधारी।

भीगी प्रीति फुहारों से है,

मधुवन में बृषभानु दुलारी।।

*

अन्तर्मन में प्रीति बसी है,

लोभ कपट सब छूटी माया।

अधरों को सिंचित करती है,

कामदेव सी तेरी काया ।।

धुन भाती वंशी की सबको,

महका दो जीवन फुलवारी।

*

पात -पात पर प्रीति पल्लवित,

स्वर्णमयी आभा फैलाती।

पावन धुन मुरली की बजती,

राधे ललिता प्रीति निभाती।।

कटुता की बेलें कटतीं हैं,

श्याम शरण पाते सुखकारी।

*

कण-कण में मनमोहन बसते,

नित उर नूतन आस जगाते।

वंशी धुन पर गोपी झूमे,

कान्हा जब भी रास रचाते।।

मंजुल नैना रूप मनोहर,

छवि कान्हा शुभ मंगलकारी।

© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)

संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268

ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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